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Muzaffarpur Shahi Litchi: मुजफ्फरपुर की शाही लीची ने बाजार में मचाई धूम

Muzaffarpur Shahi Litchi: मुजफ्फरपुर की शाही लीची ने बाजार में मचाई धूम
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Muzaffarpur Shahi Litchi: विश्व प्रसिद्ध शाही लीची, जो बिहार के मुजफ्फरपुर की पहचान है, इस साल समय से पहले ही बाज़ारों में आ गई है। लाल रंग की, मीठी और सुगंधित शाही लीची बाज़ार में आते ही लोगों को आकर्षित कर रही है। खास बात यह है कि हाल ही में हुई बारिश ने इसके स्वाद को और भी बढ़ा दिया है, जिससे इसकी मांग में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

मशहूर शाही लीची बाजार में पहुंची

मुजफ्फरपुर शहर के कई प्रमुख बाजारों, जिनमें सरैयागंज, मोतीझील, स्टेशन रोड, क्लब रोड और टावर चौक शामिल हैं, में शाही लीची बिकनी शुरू हो गई है। फिलहाल बाजार भाव लगभग 400 रुपये प्रति सौ है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि मई के आखिरी सप्ताह और जून की शुरुआत में जब लीची की बड़े पैमाने पर आवक बढ़ेगी, तो कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है।

बाजारों में लीची खरीदने वालों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। न केवल स्थानीय लोग, बल्कि अन्य शहरों से आए पर्यटक भी मुजफ्फरपुर की शाही लीची खरीदते नजर आ रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि इस साल की लीची पहले से कहीं ज्यादा मीठी और रसीली है।

सुमन कुमार, एक ग्राहक ने बताया कि बारिश से लीची की प्राकृतिक मिठास बढ़ गई है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मौसम ऐसा ही रहा तो इस साल की फसल बहुत अच्छी होगी।

पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि लीची की बड़े पैमाने पर कटाई 22 मई के बाद शुरू होगी, लेकिन अनुकूल मौसम और समय पर हुई बारिश के कारण कई बागों में फल समय से पहले ही पक गए हैं। किसानों ने चुनिंदा पेड़ों से लीची की कटाई भी शुरू कर दी है।

Muzaffarpur Shahi Litchi: किसानों और व्यापारियों के चेहरे खिले

स्टेशन रोड पर लीची बेचने वाले रवि कुमार ने बताया कि बोचाहन क्षेत्र के बागों से आने वाली लीचियां अब पूरी तरह पक चुकी हैं। पहले बाजार में आने वाली लीचियां कम मीठी होती थीं, लेकिन बारिश के बाद उनका स्वाद काफी बदल गया है।

कांटी इलाके से आए व्यापारी राजू साह का कहना है कि अभी लीची की शुरुआती आवक है। अगले एक सप्ताह में बाजार में बड़ी मात्रा में शाही लीची पहुंचने लगेगी। वहीं रोहुआ के व्यवसायी वीरू साह ने बताया कि फिलहाल कुछ चुनिंदा पेड़ों से ही लीची तोड़ी जा रही है, इसलिए मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने के कारण कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

मुजफ्फरपुर जिले में फिलहाल करीब 48 स्थानों पर लीची के अस्थायी बाजार लगाए गए हैं। बैरिया बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन रोड, क्लब रोड और जीरोमाइल चौक जैसे इलाकों में लीची की भारी बिक्री हो रही है।

मुजफ्फरपुर की शाही लीची न केवल अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह बिहार की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी है। हर साल लीची के मौसम में लगभग दो लाख लोगों को रोजगार मिलता है। लीची की कटाई, पैकिंग, परिवहन और बिक्री हजारों परिवारों की आजीविका में योगदान देती है।

यही कारण है कि जैसे ही शाही लीची बाजार में पहुंचती है, किसानों, व्यापारियों और ग्राहकों के चेहरे भी खिल उठते हैं।

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