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Bageshwar Baba Bengal: बागेश्वर बाबा के बयान से बंगाल में बवाल…भाजपा ने भी बनाई दूरी

हावड़ा के लिलुआ में रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में 4 से 6 सितंबर तक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अगुवाई में आयोजित तीन दिवसीय 'हनुमंत कथा' कार्यक्रम महज एक धार्मिक आयोजन से कहीं बढ़कर था। सरकार बदलने के बाद बागेश्वर बाबा का बंगाल का यह पहला दौरा था; हालांकि, मंच से लेकर उनके बयानों तक, हर चीज़ ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मचा दी।

Bageshwar Baba Bengal: बागेश्वर बाबा के बयान से बंगाल में बवाल...भाजपा ने भी बनाई दूरी
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Bageshwar Baba Bengal: हावड़ा के लिलुआ स्थित रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में 4 से 6 सितंबर तक चली धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तीन दिवसीय हनुमंत कथा महज़ एक धार्मिक आयोजन बनकर नहीं रह गई। सत्ता परिवर्तन के बाद बागेश्वर बाबा का ये पहला बंगाल दौरा था और इसकी सियासी अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ख़ुद पहले दिन कथा-स्थल पर पहुंचे और आशीर्वाद लिया।

वही कथा शुरू होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में शास्त्री जी ने अपने आलोचकों पर तीखा तंज़ कसते हुए कहा कि वे “मन बदलने आए हैं”, और कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में दस लाख लोगों की मौजूदगी वाले एक विशाल आयोजन का न्योता भी दे डाला। इसी दौरे में हावड़ा में दिए एक और बयान ने भी सुर्खियां बटोरीं, जिसमें उन्होंने कहा कि ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है – यानी उनके तेवर पूरे दौरे में उतने ही तीखे रहे, जितनी उनकी लोकप्रियता।

Bageshwar Baba Bengal: “दुर्गा और मुर्गा साथ-साथ नहीं चलेगा”

लेकिन असली तूफ़ान तब उठा जब धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार पर सीधा प्रहार किया। उनका एक जुमला-“दुर्गा और मुर्गा साथ-साथ नहीं चलेगा” – बंगाल में आग की तरह फैल गया। उन्होंने मांग रखी कि नवरात्रि के नौ दिनों तक पूजा पंडालों और प्रतिमाओं के आस-पास न नॉन-वेज बनाया जाए, न बेचा जाए, न खाया जाए, बल्कि मटन की दुकानें तक बंद रहनी चाहिए। जो लोग त्योहार के दौरान मांसाहार करते हुए ख़ुद को धार्मिक कहलाते हैं, उन्हें बाबा ने सीधे “पाखंडी” करार दे दिया। साथ ही उन्होंने बलि प्रथा को प्रतीकात्मक बनाने की सलाह भी दी।

ये बयान अकेला नहीं था। इससे कुछ दिन पहले, 26 अगस्त को विश्व हिंदू परिषद की बंगाल इकाई ने भी दुर्गा पूजा पंडालों को पारंपरिक स्वरूप में रखने और मांसाहार से दूरी बनाने की अपील की थी। मगर विवाद बढ़ने पर विहिप के पूर्वी क्षेत्र के सचिव अमिय सरकार को सफ़ाई देनी पड़ी कि मांसाहार पर किसी तरह की पाबंदी लगाने का कोई इरादा नहीं था और सोशल मीडिया पर चल रहा दावा भ्रामक है। लेकिन बागेश्वर बाबा के मुंह से निकले अल्फ़ाज़ ने मामले को कहीं ज़्यादा तीखा बना दिया।

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भाजपा ख़ुद असहज, टीएमसी का पलटवार

राजनीतिक हलकों में हलचल तुरंत शुरू हो गई। टीएमसी नेता मदन मित्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि बंगाल में वही होगा जो बंगाली जनता चाहेगी। दिलचस्प ये रहा कि ख़ुद भाजपा भी इस बयान से असहज नज़र आई-पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इसे शास्त्री जी की निजी राय बताते हुए साफ़ दूरी बना ली और कहा कि बंगाल के खान-पान पर कोई बाहरी फ़रमान नहीं चला सकता, बंगाली अपनी परंपरा के मुताबिक ही खाएंगे। पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय जैसे कई लोगों ने भी सवाल उठाया कि हिंदू परंपराओं की ख़ूबसूरती उनकी विविधता में है, और हर क्षेत्र की पूजा-पद्धति एक जैसी नहीं हो सकती।

सवाल यही है कि चुनाव प्रचार में जिस पार्टी ने मछली-भात को बंगाली अस्मिता से जोड़कर वोट मांगे, वही अब इस बयान से किनारा कैसे करेगी? ये लड़ाई अब सिर्फ़ थाली की नहीं, बंगाल की सांस्कृतिक पहचान की बनती जा रही है-और आने वाले दिनों में दुर्गा पूजा नज़दीक आते ही ये बहस और गरमाने के पूरे आसार हैं।

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RJ Rakesh

RJ Rakesh is a veteran Kolkata-based journalist, celebrated celebrity Radio Jockey, and renowned TV anchor. Serving as the West Bengal Head of Mithila Top, he boasts 32 years of excellence across Radio, TV, Print, and Digital. Covering politics and society, his signature writing style is widely acclaimed for delivering factually precise, lucid, and deeply engaging narratives.

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