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Nalanda University: नालन्दा विश्वविद्यालय में ‘विश्वरंग नालन्दा 2026’ का आगाज

बिहार के राजगीर में नालंदा यूनिवर्सिटी में बुधवार को दो दिन का ‘विश्वारंग नालंदा 2026’ कार्यक्रम शुरू हुआ। ‘पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया: भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला पर संवाद’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद भारत और एशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को मजबूत करना है।

Nalanda University: नालन्दा विश्वविद्यालय में ‘विश्वरंग नालन्दा 2026’ का आगाज
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Nalanda University: बिहार के राजगीर में नालंदा यूनिवर्सिटी में बुधवार को दो दिन का ‘विश्वारंग नालंदा 2026’ कार्यक्रम शुरू हुआ। ‘पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया: भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला पर संवाद’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद भारत और एशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को मजबूत करना है।

विश्वरांग फ़ाउंडेशन, रबींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (भोपाल) और नालंदा यूनिवर्सिटी की संयुक्त देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इनमें यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रोफ़ेसर सचिन चतुर्वेदी; रबींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. संतोष चौबे; ICCR के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. राजेश रंजन; नॉर्थ ईस्टर्न रीजन के विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी के. श्रीनिवास; और मुख्य वक्ता मुकुल कानितकर शामिल थे।

Nalanda University: ज्ञान और संस्कृति के साझा संबंधों पर जोर

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, Nalanda University के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने नालंदा को केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि एशियाई देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भौतिक कनेक्टिविटी के साथ-साथ ज्ञान, सांस्कृतिक परंपराओं और आपसी समझ को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने भाषाई बाधाओं को दूर करने में तकनीक और अनुवाद की भूमिका पर भी जोर दिया।

ICCR के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. राजेश रंजन ने पूर्वोत्तर भारत को एक अहम सांस्कृतिक क्षेत्र बताया, जो इस इलाके को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है। उन्होंने भाषाओं, साहित्य, गानों और छात्रों के आदान-प्रदान को अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत करने का एक असरदार ज़रिया बताया। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. संतोष चौबे ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का जिक्र करते हुए भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

अकादमिक सत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन

इस बीच, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव के. श्रीनिवास ने भाषा को संस्कृति, परंपरा और सामूहिक स्मृति का वाहक बताया। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने ज्ञान, विविधता, समावेशिता और सार्वभौमिक भाईचारे को नालंदा की मूल भावना बताया।

इस कार्यक्रम के दौरान भारतीय भाषाओं, अनुवाद, आर्थिक-सांस्कृतिक संबंधों और नालंदा की ज्ञान परंपरा पर अकादमिक चर्चाएँ हो रही हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम में रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी कला और साहित्य की प्रदर्शनी के साथ-साथ रवींद्र संगीत की एक शाम भी शामिल है। ‘विश्वरांग नालंदा 2026’ का समापन 8 अक्टूबर को बहुभाषी कविता पाठ, संगीत प्रस्तुतियों और विभिन्न अकादमिक सत्रों के साथ होगा।

संजीव कुमार बिट्टु नालंदा

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