SACJFC 2026: कानूनी शोधकर्ता प्रशांत कुमार को दूसरे ‘साउथ एशियन क्लाइमेट जस्टिस फेलोशिप एंड कैंप (SACJFC) 2026’ के लिए मेंटर के रूप में चुना गया है। इस पहल का उद्देश्य दक्षिण एशिया में युवा जलवायु कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाना, पर्यावरण कानून की समझ विकसित करना और जलवायु न्याय से जुड़े मुद्दों पर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
यह कार्यक्रम ‘वर्ल्ड्स यूथ फॉर क्लाइमेट जस्टिस’ (WYCJ) के एशियाई मोर्चे और ‘यूथ एक्शन फॉर सस्टेनेबल एंड इको नेपाल’ (YASEN) की एक संयुक्त पहल के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस फेलोशिप के माध्यम से, युवाओं को जलवायु कानून, पर्यावरण नीतियों, सतत विकास और समुदाय-आधारित जलवायु कार्यों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने और उन पर काम करने का अवसर मिलेगा।
SACJFC 2026: जलवायु कानून में विशेषज्ञता रखते हैं प्रशांत कुमार
प्रशांत कुमार अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण कानून के क्षेत्र में एक कानूनी शोधकर्ता हैं। उन्होंने भूटान के जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ से अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण कानून में LL.M. की डिग्री प्राप्त की है। इससे पहले, उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिसर्च एसोसिएट-सह-लॉ क्लर्क के रूप में काम किया है।
उनकी मुख्य रुचियों में जलवायु न्याय, पर्यावरण प्रशासन, सतत विकास, जल सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी शामिल है। उनके अनुभव में कानूनी शोध, न्यायिक विश्लेषण, अकादमिक लेखन और पर्यावरण प्रशासन से जुड़ी पहलें शामिल हैं।
प्रशांत कुमार का सह-लेखित शोधपत्र “Strengthening Youth Participation in Environmental Governance: A Comparative Study of Thailand and India” अक्टूबर 2026 में National Journal of Environmental Law में प्रकाशित होने की जानकारी दी गई है। यह शोध पर्यावरणीय नीतियों और संस्थागत प्रक्रियाओं में युवाओं की सार्थक भागीदारी के महत्व पर केंद्रित है।
अक्टूबर से जनवरी तक ऑनलाइन फैलोशिप
SACJFC 2026 का दूसरा संस्करण, 2025 में आयोजित पहले कार्यक्रम का ही अगला चरण है। पहले संस्करण में दक्षिण एशियाई देशों के युवा जलवायु कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। नेपाल के पोखरा में आयोजित एक आवासीय शिविर के दौरान, प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु कानून, स्थानीय समुदायों के अनुभवों और युवाओं के नेतृत्व में चलाए जा रहे जलवायु अभियानों पर चर्चा की।
2026 की फेलोशिप हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही है। इसका ऑनलाइन चरण अक्टूबर 2026 के मध्य से जनवरी 2027 तक चलेगा, जिसके बाद मार्च 2027 में बांग्लादेश में एक इन-पर्सन (आमने-सामने) कैंप आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से, प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने, क्षेत्रीय सहयोग में शामिल होने और जलवायु से जुड़ी स्थानीय चुनौतियों के समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।
दक्षिण एशिया में जलवायु न्याय क्यों जरूरी?
दक्षिण एशिया के कई देश जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण गर्मी, बाढ़, ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं, जल असुरक्षा, जैव विविधता के नुकसान और विस्थापन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन समस्याओं का असर अक्सर राष्ट्रीय सीमाओं के पार तक पहुँच जाता है; इसलिए, क्षेत्रीय सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान बहुत महत्वपूर्ण है।
जलवायु न्याय केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है; इसमें जलवायु वित्त, अनुकूलन के लिए सहायता, संसाधनों तक समान पहुँच, मानवाधिकार और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में प्रभावित समुदायों की भागीदारी भी शामिल है।
इस संदर्भ में, युवा कानूनी शोध, नीतिगत सुझावों, जन-जागरूकता अभियानों और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। SACJFC जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना और उन्हें अनुभवी विशेषज्ञों के साथ जोड़ना है।
यह भी पढ़ें: November Festival Calendar: नवंबर में कब है दिवाली और छठ पूजा? देखें पूरी लिस्ट
यह भी पढ़ें: BGH Bokaro: बोकारो अस्पताल में नवजात का सौदा? वायरल वीडियो के बाद जांच शुरू











