Nisha Bhagat Death: झारखंड की राजधानी रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र में आदिवासी नेता निशा भगत की मौत ने राज्य की राजनीति गरमा दी है। इस घटना से पहले निशा भगत ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर जमीन विवाद, कथित जमीन दलालों और पुलिस के बर्ताव को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस उन्हें RIMS ले गई, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
Nisha Bhagat Death: रिम्स में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
RIMS के निदेशक डॉ. बी.के. सिन्हा के अनुसार, इमरजेंसी विभाग में डॉक्टरों की एक टीम ने निशा भगत की जांच की लेकिन उन्हें मृत पाया। इसके बाद, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। रांची के DSP (मुख्यालय-1) अमन कुमार पांडे ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर पिठोरिया पुलिस उनके आवास पर पहुंची। इसके बाद उन्हें RIMS भेज दिया गया। पुलिस फिलहाल इस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
मौत से पहले सोशल मीडिया पर लाइव आई थीं निशा भगत
घटना से पहले निशा भगत सोशल मीडिया पर लाइव आई थीं। लाइव के दौरान वह भावुक दिखीं और उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के सामने वह खुद को असहाय महसूस कर रही हैं। उन्होंने आदिवासी समुदाय के अधिकारों, ज़मीन से जुड़े विवादों और कथित ज़मीन दलालों के बारे में बात की।
लाइव प्रसारण के दौरान उन्होंने फोन पर पिथोरिया स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) से बात की और आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने पुलिस से मदद न मिलने की शिकायत भी की। इस बातचीत के बाद लाइव प्रसारण समाप्त हो गया।
अब यह मांग उठ रही है कि निशा भगत ने अपने वीडियो में जिन लोगों का जिक्र किया है, उनकी भूमिकाओं की जांच की जाए और उनके द्वारा उजागर की गई व्यवस्थागत समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए। हालांकि, लगाए गए इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर साधा निशाना
निशा भगत की मौत के बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने RIMS का दौरा किया। इस घटना पर दुख जताते हुए, उन्होंने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे। मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासियों की ज़मीन हड़पने की कोशिशें चल रही हैं और ज़मीन से जुड़े मामलों में शामिल बिचौलियों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि निशा भगत ने अपनी तकलीफ के समय जिन लोगों का नाम लिया था, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की, साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
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