Bihar Politics: बिहार की पॉलिटिक्स एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ती दिख रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के संभावित इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर पॉलिटिकल गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री नए नेता को चुनने के लिए विधानमंडल दल की एक अहम मीटिंग बुला सकते हैं।
12 अप्रैल को नए CM पर फैसला संभव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 अप्रैल को विधानमंडल दल की मीटिंग होने की उम्मीद है। इस मीटिंग में मौजूदा मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी पर फैसला हो सकता है। पॉलिटिकल एनालिस्ट्स का मानना है कि यह मीटिंग बिहार में सत्ता का अगला चेहरा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। मीटिंग में चुने गए नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar ) 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे। यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बिहार की पॉलिटिक्स में बड़े बदलाव हो सकते हैं। दिल्ली से लौटने के बाद वे सीधे विधानमंडल दल की मीटिंग करेंगे और फिर गवर्नर को अपना इस्तीफा सौंपने के लिए राजभवन जाएंगे।
Bihar Politics: 8 अप्रैल को आखिरी कैबिनेट मीटिंग!
8 अप्रैल को कैबिनेट मीटिंग भी तय है। पॉलिटिकल सूत्रों का कहना है कि यह मीटिंग मौजूदा सरकार की आखिरी कैबिनेट मीटिंग हो सकती है। इस मीटिंग में कई अहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है, जिससे अगली सरकार की नींव रखी जाएगी। कैबिनेट मीटिंग को लेकर एडमिनिस्ट्रेटिव गलियारों में भी हलचल है।
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नई सरकार बनने को लेकर एक और अहम पहलू खरमास को माना जा रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, खरमास को शुभ कामों के लिए अशुभ माना जाता है। इसलिए, उम्मीद है कि खरमास खत्म होने के बाद ही नई सरकार बनेगी। इसका मतलब है कि बिहार में नई सरकार बनने में कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।
Bihar Politics: पॉलिटिकल पार्टियों के बीच मीटिंग शुरू
सूत्रों के मुताबिक, सरकार बनने का प्रोसेस ऑफिशियली 10 अप्रैल के बाद ही शुरू होगा। पॉलिटिकल पार्टियों के बीच मीटिंग और स्ट्रैटेजी बनाने का काम तेज हो गया है। सत्ता समीकरणों को बैलेंस करने और मेजोरिटी पक्का करने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार की पॉलिटिक्स को गरमा दिया है। विपक्षी दल भी हालात पर करीब से नजर रख रही हैं और किसी भी मौके का फायदा उठाने की तैयारी कर रही हैं। इस बीच, सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर इस बात पर बातचीत चल रही है कि लीडरशिप किसे मिलनी चाहिए।
कुल मिलाकर, आने वाले दिन बिहार की पॉलिटिक्स के लिए अहम साबित होंगे। सबकी निगाहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले पर टिकी हैं। अगर वह इस्तीफा देते हैं, तो इससे राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता साफ होगा और एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी।
















