Shrimad Bhagwat Katha: फुलवारी शरीफ स्थित चकबैरिया में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के तहत श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर वृंदावन स्थित पवन धाम से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी चतुर्भुज जी महाराज ने प्रवचन देते हुए माता कुंती की श्रीकृष्ण भक्ति का उल्लेख कर श्रद्धालुओं को भक्ति, धैर्य और समर्पण का संदेश दिया।
स्वामी चतुर्भुज जी महाराज ने कहा कि महाभारत काल की महान भक्त माता कुंती द्वारा गाया गया श्रीकृष्ण स्तवन आज भी पूर्ण समर्पण और निःस्वार्थ प्रेम का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि माता कुंती का यह भावनात्मक स्तवन केवल भगवान की स्तुति नहीं बल्कि शरणागति की सर्वोच्च अवस्था को दर्शाता है। उन्होंने माता कुंती के प्रसिद्ध कथन “विपत्तियां आती रहें ताकि हमारा मन सदा भगवान का स्मरण करता रहे” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाता है।
पूर्ण शरणागति के बारे में बताया
स्वामी चतुर्भुज जी महाराज ने बताया कि माता कुंती के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान होने के बावजूद अत्यंत सरल और भक्तवत्सल हैं। वे अपने भक्तों के संकट में सखा बनकर साथ खड़े रहते हैं। सच्ची भक्ति किसी वरदान की याचना नहीं बल्कि भगवान से अटूट संबंध का प्रतीक होती है। प्रवचन के दौरान आचार्य रामानुजाचार्य की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने “प्रपत्ति” अर्थात पूर्ण शरणागति के सिद्धांत की व्याख्या की।
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उन्होंने कहा कि जब भक्त अहंकार त्याग कर स्वयं को भगवान को समर्पित कर देता है, तभी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन के सुख-दुख दोनों परिस्थितियों में भगवान का स्मरण करने का संदेश दिया। फुलवारी शरीफ आयोजन समिति ने बताया कि शुक्रवार को कान्हा जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में राम पुकार सिंह, कल्याण सिंह, गोपाल समेत कई शामिल रहे।
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शंभू कांत सिन्हा













