Darbhanga Crime News: शनिवार देर रात बहादुरपुर पुलिस स्टेशन इलाके के अंतर्गत आने वाली दरहार पंचायत के अब्दुल्लापुर इलाके में ग्रामीणों द्वारा हरिओम कुंवर (हरिपत्ती पंचायत के मुखिया कैलाश कुंवर के बेटे) की कथित पिटाई की घटना अब कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि शुरू में इस घटना को चोरी के शक का मामला माना जा रहा था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर युवक के बयान, घटना की जगह और उसे पकड़े जाने के हालात को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, हरिओम कुंवर को देर रात संदिग्ध हालात में देखे जाने के बाद पकड़ा गया। इसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई और उन्होंने उस पर हमला कर दिया। बाद में, सूचना मिलने पर ‘112’ इमरजेंसी पुलिस टीम वहाँ पहुँची और उस युवक को बहादुरपुर पुलिस स्टेशन ले गई। हालांकि, पुलिस की पूछताछ में उस युवक ने चोरी के आरोपों से इनकार किया। उसने बताया कि वह एक दोस्त को छोड़कर लौट रहा था, तभी छह-लेन वाले हाईवे पर पुलिया के पास उसकी मोटरसाइकिल की चेन उतर गई; वह सड़क किनारे उसे ठीक कर रहा था, तभी कुछ लोगों ने उसे देखा, शोर मचाया और फिर उस पर हमला कर दिया।

Darbhanga Crime News: घटनास्थल को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में घटनास्थल और युवक के पकड़े जाने की जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि युवक की मोटरसाइकिल सिक्स लेन की पुलिया के पास थी, जबकि उसे कथित तौर पर एक व्यक्ति के घर के समीप पकड़ा गया, जहां उसके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी अंतर को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि युवक वास्तव में चोरी के उद्देश्य से वहां मौजूद था तो घटनाक्रम की पूरी कड़ी क्या थी और वह मोटरसाइकिल खड़ी करने वाली जगह से दूसरी जगह तक कैसे पहुंचा? इन सवालों का जवाब पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
चोरी के आरोप के पीछे कहीं कोई दूसरा कारण तो नहीं?
इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों के बीच एक और थ्योरी भी चल रही है। हालाँकि, न तो इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है और न ही पुलिस ने इसकी पुष्टि की है। अटकलें हैं कि उस युवक का वहाँ होना चोरी के बजाय किसी निजी मुलाक़ात से जुड़ा हो सकता है। इसी वजह से, कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि उस युवक को देखकर भड़के गुस्से की असली वजह कुछ और हो सकती है, और बाद में पूरी घटना को चोरी के शक से जोड़ दिया गया। हालाँकि, यह सिर्फ़ स्थानीय लोगों का अंदाज़ा है; सच का पता तो जाँच के बाद ही चल पाएगा।

न चोरी की लिखित शिकायत, न मारपीट को लेकर आवेदन
इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि युवक पर चोरी का आरोप होने के बावजूद, अब तक किसी भी ग्रामीण ने पुलिस स्टेशन में इस घटना के बारे में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस के अनुसार, ‘112’ टीम युवक को स्टेशन ले आई थी, लेकिन बाद में मामले की जानकारी लेने के लिए दोनों पक्षों को बुलाया गया। खबर है कि स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गई। किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत न किए जाने पर युवक को पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया गया।
यह भी पढ़ें: JPSC Protest News: JPSC-JSSC छात्रों ने CM आवास घेराव का किया ऐलान
पुलिस जांच होती तो सामने आ सकती थी पूरी सच्चाई
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उस युवक के साथ मारपीट हुई थी और उस पर चोरी का गंभीर आरोप लगा था, तो पूरी घटना की विस्तृत जांच होने से पहले ही मामले को आपसी समझौते से क्यों निपटा लिया गया? अगर पुलिस मोटरसाइकिल की हालत, युवक द्वारा बताई गई जगह, जहाँ उसे पकड़ा गया था वह स्थान, वहाँ मौजूद चश्मदीद गवाहों और घटनाक्रम की पूरी जाँच करती, तो यह साफ़ हो सकता था कि मामला सचमुच चोरी के शक से जुड़ा था या इसके पीछे कोई और विवाद या निजी वजह थी। फिलहाल, किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत न मिलने के कारण इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई नतीजा नहीं निकला है। ऐसे हालात में, घटना की असल वजह का पता लगाने के लिए दोनों पहलुओं यानी चोरी के आरोप और युवक के साथ कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच ज़रूरी मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें: मेयर रोशनी खलखो ने किया AHA Fashion Store का उद्घाटन










