Moin Pokhar Darbhanga: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), ईस्टर्न ज़ोन (कोलकाता) ने शहर के एक अहम जलाशय, ‘मोइन पोखर’ की सीमा तय करने और उस पर कथित कब्ज़े के मामले में सख़्त रुख़ अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने दरभंगा नगर निगम के नगर आयुक्त को 30 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में, नगर आयुक्त को पुराने राजस्व रिकॉर्ड, कब्ज़े की स्थिति और तालाब की सीमा तय करने के संबंध में अब तक की गई कार्रवाई का विवरण पेश करना होगा।
Moin Pokhar Darbhanga: मोईन पोखर के सीमांकन को लेकर मामला
‘तालाब बचाओ अभियान’ ने मोइन पोखर के संरक्षण और उस पर कथित कब्ज़े का मामला उठाया है। यह मामला NGT के रिकॉर्ड में ओरिजिनल एप्लीकेशन नंबर 14/2025/EZ के तौर पर दर्ज है। जनवरी 2025 में ट्रिब्यूनल के सामने दायर इस एप्लीकेशन में मोइन पोखर को दरभंगा में मौजूद एक प्राकृतिक जल स्रोत बताया गया है और इसके आस-पास कथित कब्ज़े और जल प्रदूषण का ज़िक्र किया गया है।
NGT के पास मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार, मोइन पोखर दरभंगा सदर और बहादुरपुर इलाकों के कई मौज़ों (राजस्व गांवों) में फैला हुआ बताया गया है। शुरुआती अर्ज़ी में इसका क्षेत्रफल लगभग 100 एकड़ बताया गया था, जबकि स्थानीय पक्ष इसे 150 एकड़ से ज़्यादा बड़े जल-निकाय के तौर पर बताते हैं; नतीजतन, इसके कुल क्षेत्रफल को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
रिकॉर्ड में 88 लोगों के अतिक्रमण का उल्लेख
अप्रैल 2025 में नगर निगम की ओर से NGT में दाखिल एक हलफनामे में बताया गया कि काज़ीपुरा मौज़ा में स्थित मोइन पोखर की ज़मीन के एक हिस्से पर 88 लोगों ने घर और बाउंड्री वॉल बना लिए थे। दस्तावेज़ में कहा गया कि प्रभावित इलाके में लगभग 3 बीघा, 2 कट्ठा और 16 धुर ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया था।
बाद के सरकारी रिकॉर्ड में काज़ीपुरा में मौजूद पुराने खेसरा नंबर 95 और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के खेसरा नंबर 31443 के साइट इंस्पेक्शन का भी ज़िक्र है। इसमें 88 लोगों द्वारा कथित तौर पर किए गए कब्ज़े और सड़क के तौर पर इस्तेमाल हो रहे हिस्से के बारे में जानकारी दर्ज है।
30 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में म्युनिसिपल कमिश्नर का खुद पेश होना और उनकी रिपोर्ट बहुत अहम होगी। प्रशासन को NGT को यह बताना होगा कि मोइन पोखर की सीमा तय करने और कब्ज़े से जुड़े मुद्दों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
मोइन तालाब के संरक्षण, सीमांकन और कथित अतिक्रमण की स्थिति, चल रही न्यायिक कार्यवाही में मुख्य मुद्दे बने हुए हैं। इसलिए, स्थानीय निवासी और याचिकाकर्ता पक्ष ट्रिब्यूनल के सामने अगली सुनवाई में पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
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