Jharkhand Exam Scam: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। CID कार्रवाई का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। CID के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, JPSC और JSSC से जुड़े मामलों में अब तक कुल 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 200 से ज़्यादा संदिग्ध जांच एजेंसी की नज़र में हैं।
Jharkhand Exam Scam: अधिकारी से अभ्यर्थियों तक CID की जांच
CID की जांच के कारण JPSC से जुड़े मामलों में 24 और JSSC-CGL परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में 7 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। जांच एजेंसी परीक्षा कराने वाली एजेंसियों, आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों, कथित बिचौलियों और गलत तरीकों से सफलता पाने के आरोपी उम्मीदवारों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

JPSC मामले में कार्रवाई कथित मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी की गिरफ़्तारी के साथ शुरू हुई। इसके बाद परीक्षा की तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा एजेंसी TDPL से जुड़े कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया। उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को 4 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया, जबकि रक्षक सिंह, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और धर्मेंद्र कुमार को 5 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया।
पेपर लीक से लेकर मनी ट्रेल तक जांच
10 अगस्त को JPSC के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते की गिरफ्तारी से जांच ने एक नया मोड़ ले लिया। इसके बाद 18 अगस्त को अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और उनके भाई अक्षय कुमार तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। CID पूछताछ के ज़रिए परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और आरोपियों के बीच संबंधों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
इस बीच JSSC-CGL मामले में 27 अगस्त को सोमांशु प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ़्तार किया गया। अगले दिन, चार सफल उम्मीदवारों दीपक कुमार, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह और उमेश कुमार राय को गिरफ़्तार किया गया। वही 30 अगस्त को गिरिडीह के रहने वाले समीर कुमार को भी गिरफ़्तार किया गया।
200 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ
जांच अब कथित पेपर लीक से आगे बढ़कर OMR शीट, WhatsApp पर शेयर की गई गोपनीय जानकारी, मोबाइल कम्युनिकेशन और वित्तीय लेन-देन तक फैल गई है। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़ी जानकारी कैसे लीक हुई और इस कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान करने पर काम कर रही है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की भी एंट्री हो चुकी है। CID में दर्ज FIR नंबर 16/2026 के आधार पर, ED ने ECIR दर्ज की है और वित्तीय लेन-देन, गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए गए फंड और संभावित मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी है।
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CID सात आरोपियों की तलाश कर रही है: आदित्य पांडे, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडे। जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए, आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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