Darbhanga News: Mithila Student Union के नेतृत्व में मंगलवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में कुलपति के कार्यालय के सामने एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कृष्ण मोहन झा ने किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के अंतर्गत नव स्वीकृत 208 डिग्री कॉलेजों में मैथिली भाषा में सहायक प्रोफेसर के पदों के सृजन की मांग करना था।
LNMU कुलपति कार्यालय पर धरना
विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मैथिली बिहार की एकमात्र मातृभाषा है जो भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में संविधान के 92वें संशोधन के माध्यम से मैथिली भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई, जो मिथिला समुदाय के लिए गर्व का विषय है।
वक्ताओं ने बताया कि मैथिली शिक्षा, प्रशासन और बौद्धिक क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। बड़ी संख्या में छात्र मैथिली को विषय के रूप में चुनकर संघ लोक सेवा आयोग और बिहार लोक सेवा आयोग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
इसके बावजूद, छात्रों ने नव-मान्यता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में मैथिली भाषा की उपेक्षा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह स्थिति नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के भी विपरीत है, जो मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर देती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन से की बड़ी मांग
Mithila Student Union ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि नव स्वीकृत 208 डिग्री कॉलेजों में मैथिली विषय के सहायक प्रोफेसर के पद शीघ्र ही सृजित किए जाएं, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा में अपनी मातृभाषा में अध्ययन करने का अवसर मिल सके।
संगठन ने कुलपति से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, छात्रों ने मैथिली भाषा के शैक्षणिक सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग की।
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