Darbhanga Teacher Election: जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के संदर्भ में सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। बेगूसराय से गहरा जुड़ाव रखने वाले डॉ. राय ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव, स्कूलों के प्रबंधन और शिक्षक संगठनों में सक्रिय भूमिका के जरिए अपनी पहचान बनाई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही, वे लगातार शिक्षकों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। डॉ. सुरेश राय का जन्म 5 जनवरी 1959 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेगूसराय के बीपी हाई स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विज्ञान में एम.एससी. और पीएच.डी. की डिग्री पूरी की।
Darbhanga Teacher Election: 1981 में की विद्यालय की स्थापना
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक विज्ञान शिक्षक के रूप में की और कई वर्षों तक बेगूसराय में पढ़ाया। उन्हें विज्ञान शिक्षण में उत्कृष्टता के लिए ‘राज्य पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने सामान्य विज्ञान विषय पर कई किताबें भी लिखी हैं।
बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, डॉ. राय ने 30 दिसंबर 1981 को ‘सुहृद बाल शिक्षा मंदिर’ की स्थापना की। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया यह प्रयास उनकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। डॉ. सुरेश राय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दोनों में गवर्निंग बॉडी के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने बेगूसराय के MRJD कॉलेज में अध्यक्ष का पद भी संभाला है।
शिक्षक हितों के लिए सक्रिय भूमिका
अपने शिक्षण करियर के बाद, डॉ. राय ने शिक्षक संगठनों और शिक्षकों से जुड़ी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने 30 अप्रैल 2011 को बेगूसराय के बीपी स्कूल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद, वे शिक्षकों के हितों और अधिकारों, तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों में और भी अधिक सक्रिय हो गए। उन्होंने ‘बिहार सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन’ के राज्य उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है।
BJP से जन सुराज तक का राजनीतिक सफर
राजनीतिक रूप से, डॉ. सुरेश राय पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हुए थे। उन्होंने BJP के ‘शिक्षक प्रकोष्ठ’ (Teachers’ Cell) के राज्य सह-संयोजक के रूप में काम किया है। पार्टी से टिकट न मिलने के बाद वे ‘जन सुराज पार्टी’ में शामिल हो गए। इससे पहले, उन्होंने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दो बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।
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