Trade Union Strike: नए लेबर कानून के खिलाफ सेंट्रल लेबर यूनियनों की हड़ताल शुरू हो गई है। इसका झारखंड और बिहार में भी बड़ा असर दिख रहा है। धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर की कोलियरी, इंडस्ट्रियल यूनिट और बैंकों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। बोकारो थर्मल के CCL गोविंदपुर-स्वांग प्रोजेक्ट में नए लेबर कानून के विरोध में ट्रेड यूनियन की हड़ताल चल रही है। मजदूर काम पर नहीं आए हैं। वहीं, बोकारो में बैंकों में काम रुका हुआ है। CCL B&K एरिया के खासमहल कोनार प्रोजेक्ट और बोकारो कोलियरी में हड़ताल का असर दिख रहा है। प्रोडक्शन पर असर पड़ रहा है और ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह से रुका हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोकारो के CCL कथारा एरिया के कथारा कोलियरी, कथारा वाशरी और जारंगडीह में प्रोडक्शन बुरी तरह ठप हो गया है। सारी मशीनरी रुकी हुई हैं और ट्रांसपोर्टेशन भी ठप हो गया है। पूरे कथारा क्षेत्र में कथारा कोलियरी के प्रथम पाली के 84 में से 23 मुख्य मजदूर उपस्थित रहे, कथारा कोलियरी वाश वर्कशॉप के 165 में से 41 मुख्य मजदूर उपस्थित रहे, कथारा कोलियरी के 59 में से 2… गिरिडीह जिले के गांववा, जमुआ, घोड़थंभा समेत अन्य प्रखंडों में सड़कें जाम कर दी गयी हैं, जबकि कई अन्य जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है.
देवघर के चित्रा कोलियरी में देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में मजदूर सड़क पर उतर आये. पुलिस ने हड़ताली मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया है.
कोयला क्षेत्र धनबाद में नए श्रम कानूनों के खिलाफ केंद्रीय श्रमिक संघों की देशव्यापी हड़ताल का असर गुरुवार की सुबह से ही कोलियरी क्षेत्रों में दिखा. संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सुबह से ही कोलियरी परिसर के एरिया वन स्थित शताब्दी उपस्थिति भवन के समीप जोरदार विरोध प्रदर्शन किया यूनाइटेड फ्रंट की ट्रेड यूनियनों ने चारों लेबर कानूनों को जनविरोधी बताया है और एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।
यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि चारों लेबर कानून मज़दूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं। BJP सरकार द्वारा लागू किए गए चारों लेबर कानून मज़दूर विरोधी, गरीब विरोधी और असंवैधानिक हैं। आज एक दिन की हड़ताल है। अगर ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
हालांकि, यूनाइटेड फ्रंट ने कहा कि BJP सरकार ने मज़दूरों को गुलाम बनाने वाला कानून लागू किया है। इस कानून के ज़रिए ट्रेड यूनियनों को कमज़ोर किया जा रहा है। BCCL के सभी एरिया में पहली शिफ्ट में इसका असर महसूस किया गया, हालांकि भारतीय मज़दूर संघ (BMS) देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहा है।
AITUC, HMS, CITU और INTUC से जुड़ी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का फ़ैसला किया है। इस हड़ताल का राज्य के कोयला, स्टील और बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा असर पड़ेगा। लेबर यूनियनों का दावा है कि झारखंड में लगभग 10 लाख मज़दूर हड़ताल में हिस्सा लेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हड़ताल का सबसे ज़्यादा असर कोयला कंपनियों पर पड़ेगा।
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झारखंड में आम हड़ताल का CCL, BCCL, SAIL और टाटा वर्कर्स यूनियन समेत दूसरी कंपनियों पर खासा असर पड़ेगा। लेबर यूनियनों ने भी इसके लिए तैयारी कर ली है। पिछले कई दिनों से यूनियन के सदस्य कोयला कंपनियों के ऑफिस में लेबर लॉ के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। गेट और पिट मीटिंग भी हो चुकी हैं।
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