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Karma Puja 2026: करमा पर्व में क्यों पूजी जाती है करम डाली?

भादो महीने की एकादशी आते ही झारखंड के गांवों का माहौल बदलने लगता है। घरों और अखाड़ों (गांव के पारंपरिक आंगन) में 'जावा' की टोकरियां सजाई जाती हैं, सुबह-शाम लोक गीतों की गूंज सुनाई देती है और 'करम' की डाल लाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

Karma Puja 2026: करमा पर्व में क्यों पूजी जाती है करम डाली?
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Karma Puja 2026: भादो महीने की एकादशी आते ही झारखंड के गांवों का माहौल बदलने लगता है। घरों और अखाड़ों (गांव के पारंपरिक आंगन) में ‘जावा’ की टोकरियां सजाई जाती हैं, सुबह-शाम लोक गीतों की गूंज सुनाई देती है और ‘करम’ की डाल लाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। शाम को करम की डाल की पूजा होती है और उसके बाद मांदर की थाप पर करमा और झूमर नृत्य किए जाते हैं, जिससे देर रात तक अखाड़े जीवंत और चहल-पहल से भरे रहते हैं।

करमा (Karma Puja 2026) त्योहार सिर्फ़ झारखंड तक ही सीमित नहीं है। बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी अलग-अलग समुदाय इसे अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाते हैं। नेपाल के तराई इलाकों और बांग्लादेश के कुछ आदिवासी समुदायों में भी करमा से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाता है।

Karma Puja 2026: करमा की तैयारी कैसी होती हैं?

करमा त्योहार की तैयारी कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है; इस चरण को ‘जावा जगाना’ कहा जाता है। बांस की छोटी टोकरियों में साफ़ रेत भरी जाती है और उनमें कई तरह के अनाज जैसे में जौ, गेहूं, मक्का, कुर्थी, उड़द, मूंग और चना बोए जाते हैं। कई जगहों पर सात तरह के अनाज बोने की परंपरा है, जबकि कुछ जगहों पर नौ तरह के अनाज इस्तेमाल किए जाते हैं।

महिलाएँ और लड़कियाँ हर सुबह-शाम ‘जावा’ को पानी देती हैं और उसके चारों ओर घूमते हुए पारंपरिक गीत गाती हैं। कुछ ही दिनों में रेत से अनाज के छोटे-छोटे अंकुर निकलने लगते हैं। लोक-मान्यता के अनुसार, इन्हें हरियाली, भरपूर फ़सल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

क्यों की जाती हैं करम डाली की पूजा?

करमा त्योहार का मुख्य उत्सव भादो एकादशी के दिन मनाया जाता है। ग्रामीण करम पेड़ की डालियाँ लाते हैं और उन्हें अखाड़ा (गाँव का उत्सव स्थल) या घर के आँगन में स्थापित करते हैं। कई जगहों पर करम की तीन डालियाँ लाने की भी परंपरा है। शाम के समय महिलाएं और बहनें पूजा-स्थल पर इकट्ठा होती हैं। पूजा में फूल, अक्षत (साबुत चावल के दाने), दीपक और ‘जावा’ का इस्तेमाल किया जाता है। करम देवता को फल और फूल चढ़ाए जाते हैं।

वही कई इलाकों में बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, खुशी और तरक्की के लिए प्रार्थना करती हैं और ‘करम धागा’ बांधने की परंपरा भी निभाई जाती है। करमा पूजा के दौरान करमा और धर्मा की कहानी सुनाने की परंपरा है। यह लोककथा दो भाइयों, करमा और धर्मा की कहानी बताती है। इस कहानी का मुख्य संदेश अच्छे काम करने, प्रकृति का सम्मान करने और अपनी गलतियों को स्वीकार करने पर केंद्रित है।

आम मान्यता के अनुसार, करम पेड़ का अनादर होने पर एक परिवार पर संकट आ गया था, लेकिन जब करम देवता की पूरी श्रद्धा के साथ फिर से पूजा की गई, तो खुशहाली लौट आई। हालाँकि अलग-अलग इलाकों में इस कहानी के पात्रों और घटनाओं को थोड़ा अलग तरह से सुनाया जा सकता है, लेकिन इसका मुख्य संदेश प्रकृति और अपने कर्मों का सम्मान करना एक जैसा ही रहता है।

क्यों हैं भाई-बहन के रिश्ते और खेती से जुड़ा पर्व?

झारखंड में कर्मा त्योहार का एक अहम पहलू भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है; बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, खुशी और खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। वहीं, करम पेड़ की पूजा और ‘जावा’ टोकरियों में बोए गए अलग-अलग तरह के अनाज, खेती और प्रकृति के साथ इस त्योहार के गहरे जुड़ाव को दिखाते हैं। गाँव का ‘अखाड़ा’ करमा त्योहार का मुख्य केंद्र होता है। पूजा-पाठ के बाद, पूरा समुदाय वहाँ इकट्ठा होता है। मांदर, ढोल और नगाड़े की ताल पर करमा और झूमर नृत्य शुरू होते हैं। साथ गाए जाने वाले गीतों में खेत-खलिहान, बारिश, प्रकृति, परिवार, प्यार और रिश्तों जैसे विषय शामिल होते हैं।

कई राज्यों में अलग-अलग रूप

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई आदिवासी इलाकों में, ‘कर्मा’ का संबंध कर्म (काम), कड़ी मेहनत और सामुदायिक जीवन से है। ओडिशा की कुछ लोक परंपराओं में, करम पेड़ की एक शाखा की पूजा ‘करमसनी’ देवता के रूप में की जाती है। असम के चाय बागान इलाकों में रहने वाले ‘टी ट्राइब’ (चाय जनजाति) समुदायों के बीच भी, इस त्योहार को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का एक मौका माना जाता है। पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों, जैसे पुरुलिया और झारग्राम में भी ‘करमा’ से जुड़ी लोक परंपराएँ पाई जाती हैं। हालाँकि, पूजा-पाठ के रीति-रिवाजों और उनसे जुड़ी मान्यताओं में स्थानीय स्तर पर अंतर देखने को मिलता है।

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