Bihar News: राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी), डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार और सीआईएमपी ने राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार, 18 फरवरी 2026 को सीआईएमपी परिसर में संयुक्त रूप से सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का विषय था “विकास के इंजन के रूप में क्लस्टर: MSME में उत्पादकता को अधिकतम करना – प्रतिस्पर्धी MSME क्लस्टरों के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत की ओर”।
सम्मेलन का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ और स्वागत भाषण कुमोद कुमार, सीएओ, सीआईएमपी और अध्यक्ष, बिहार चैप्टर, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने दिया। उन्होंने कहा, “MSME को सतत विकास की रीढ़ कहना बिल्कुल सही है। बिहार में, रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और समावेशी विकास को गति देने के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को बदलने की अपार क्षमता इनमें निहित है।” सम्मेलन के मुख्य अतिथि बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, आईएएस थे।
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सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “बिहार की प्रगति का सही माप केवल बड़े पैमाने पर अवसंरचना या औद्योगिक विकास में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के सशक्तिकरण में निहित है। सतत विकास की शुरुआत हमारे गांवों और छोटे कस्बों से होनी चाहिए, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में हर पहल समृद्धि की लहर पैदा करती है। लघु एवं मध्यम उद्यमों, कृषि और स्थानीय उद्यमों को मजबूत करके बिहार समावेशी विकास का एक ऐसा मॉडल बना सकता है जो समुदायों का उत्थान करे और यह सुनिश्चित करे कि विकास अंतिम छोर तक पहुंचे।”
प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की महानिदेशक नीरजा शेखर, आईएएस ने कहा, “उत्पादकता सप्ताह के अंतर्गत इस सम्मेलन की मेजबानी करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यह सम्मेलन उत्पादकता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और सुदृढ़ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति हमारे राष्ट्रीय संकल्प की पुष्टि करता है।” सीआईएमपी के सीएओ और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बिहार चैप्टर के अध्यक्ष कुमोद कुमार ने कहा, “एमएसएमई भारत की सुदृढ़ता के सच्चे चालक हैं, और क्लस्टर आधारित विकास उन्हें वैश्विक सफलता के लिए व्यापकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार प्रदान करता है। सीआईएमपी और सीआईएमपी बीआईआईएफ के माध्यम से, हम विकसित भारत @2047 के अनुरूप प्रतिभा और उत्पादकता पहलों को पोषित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कई कार्यक्रम आयोजित
इस खास अवसर पर कई गतिविधियाँ शामिल रही, जिसमें लोगों ने अच्छी भागीदारी की। एक, अवधारणा लेखन (1000 शब्दों तक): लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में उत्पादकता, नवाचार, प्रौद्योगिकी अपनाने और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में क्लस्टर-आधारित विकास कैसे सहायक हो सकता है, इस पर नए विचारों पर शोध पत्र।
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दूसरा, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ: एमएसएमई के आधुनिकीकरण, आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता में सुधार और भारत के औद्योगिक आधार को मजबूत करने में क्लस्टरों की भूमिका पर चर्चा। तीसरा, पोस्टर प्रस्तुतियाँ: भारत में क्लस्टरों, उत्पादकता और विनिर्माण के महत्व को उजागर करने वाले रचनात्मक चित्र।
शंभू कांत सिन्हा













