Bihar News: बिहार की समृद्ध ग्रामीण हस्तशिल्प का हुनर और लज़ीज पकवान की सोंधी खुशबू हर किसी को अपनी ओर खींचकर पटना के गांधी मैदान स्थित सरस मेला में आने को मजबूर कर रही है। जहां विजिटर अपने संस्कृति, परम्परा और स्वाद से जुड़ में रहे हैं। आधुनिकता के दौर में बिहार सरस मेला आमजन विशेष तौर पर युवा पीढ़ी को राज्य की विरासत और संस्कृति से रु-ब- रु करने का अच्छा मंच दे रहा है। सरस मेला में बिहार समेत देश के 25 राज्यों से आए लोगों ने स्टॉल लगाया है। जिसमें बिहार प्रदेश के विभिन्न जिलों के हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) विशेष रूप से लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर हैं। कॉटन कपड़े पर एप्लिक वर्क, रेशम के कपड़े, होम डेकोर के सामान, वुड आर्ट, स्टोन आर्ट, बैंबू आर्ट, टिकुली आर्ट और खादी के फैशनेबल कपड़ों की भरमार सी है।
यूथ को भा रहा संगीत
जहां एक ओर सरस मेला में 500 से अधिक स्टाल लगे हैं। वहीं, मेला में ही गीत, संगीत और परिचर्चा आदि भी सभी को खूब भा रहा है। खास तौर पर यूथ इसके दीवाने हैं। शुक्रवार को
सांस्कृतिक मंच पर सुमधुर गीत एवं बिहार के लोक नृत्य की प्रस्तुति की गयी। नाजित बानी एवं राहुल सहनी की”आजा शाम होने आईं” की
युगल प्रस्तुति ने दर्शकों की तालियां बटोरी। इसके बाद अरुण और उनकी टीम ने “अरे रामा रिमझिम बरसे बदरिया” हाली बरस इंद्र देवता,पानी बिन पडल अकाल हो राम” समेत कई लोकगीतों पर नृत्यों की प्रस्तुति कर दर्शकों की वाहवाही लुटी। मंच संचालन आशा कुमारी परियोजना प्रबंधक जीविका ने किया।
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19 करोड़ से अधिक के आइटम बिके
जीविका द्वारा आयोजित पटना के गांधी मैदान में बिहार सरस मेला बीते 12 दिसंबर लगातार जारी है। यहां आगंतुक अपनी लोक संस्कृति लोक गीत, लोक नृत्य एवं देशी स्वाद का दीदार करते हुए लुत्फ भी उठा रहे हैं। बीते 14 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 19 करोड़ रुपये से अधिक का है। अनुमानतः 12 लाख से अधिक लोग मेला में आए है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरस मेला का आकर्षण साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। कई पीढ़ियां एक साथ मेला में आ रही हैं और मेला के सेल्फी ऑन पर फोटो लेकर सुंदर यादों को संजो रही हैं। पालना घर में छोटे छोटे बच्चे बयां के लिए खेलने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां दंपत्ति अपने बच्ची को खेलने के लिए छोड़कर मेला का आनंद उठाती है।
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सरस रसोई में भी उमड़ी भीड़
सरस मेला में रसोई वाले स्टाल पर भी बड़ी संख्या में लोगों का दिन भर आना जाना लगा रहा। लोग रसोई के स्टाल पर देशी व्यंजनों एवं मिठाइयों का स्वाद ले रहे हैं। जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्प ग्राम में स्टॉल, साड़ी समेत कई प्रकार के खादी एवं सिल्क आदि से बने परिधानों की बिक्री जारी है। इसी क्रम में जानकी सिलाई केंद्र के स्टॉल में भी सूट, दुपट्टा, स्टॉल, नाइटी आदि की भी बिक्री हो रही है। इसी प्रकार हैंडीक्राफ्ट की कलाकृतियों, परिधान, गर्म कपड़े, रजाई, दोहर, कंबल, चादर, कालीन, स्पा, टेराकोटा, सेरामिक, , कृत्रिम फूल एवं गहने, सुगंधित इत्र, सत्तू , मड़ुआ, जौ का आटा, आचार, पापड़, अडवरी, दनवरी, मालभोग आदि की बड़े पैमाने पर बिक्री जारी है।
शंभूकांत सिन्हा | पटना













