Bihar Saras Mela 2025: जब गांव का हुनर एक मंच पर आ जाए और उनकी प्रतिभा को शानदार मंच मिले तो ये सरस मेला ही है। बीते चार दिनों से पटना का गांधी मैदान बिहार समेत 25 राज्यों के सैकड़ों स्टॉल से गुलजार है। मंगलवार को भी मशहूर देसी व्यंजन, पारंपरिक हस्तकरघा, हैंडलूम, स्टोन आर्ट, आकर्षक परिधान, जैविक कृषि उत्पाद समेत बहुत कुछ प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए स्टॉल पर मिले। सरस मेला का लोगों के बीच क्रेज इतना है कि महज चार दिनों में 3 करोड़ 84 लाख 51 हजार रुपये का व्यवसाय हुआ है। अनुमान है कि अब तक 2 लाख 76 हजार लोग यहां विजिट कर चुके हैं। साथ ही देशी व्यंजनों का भी भरपूर लुत्फ़ उठाया है। मेला में सुसज्जित हर स्टॉल पर हुनरमंद और आत्मनिर्भर महिलाओं की सफलता की इबारत लिखी है।
Bihar Saras Mela 2025: सेल्फ हेल्प ग्रुप की सफलता
सरस मेला का आयोजन लोगों को सेल्फ हेल्प ग्रुप की सफलता से भी रु-ब- रु करा रहा है। जानकारी हो कि बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वाधान में जीविका द्वारा 28 दिसंबर 2025 तक गाँधी मैदान, पटना में आयोजित है। ग्रामीण महिलाओं के हुनर को प्रोत्साहन देते हुए उन्हें स्वयं सहायता समूह से जोड़कर प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन देना इसका मूल ध्येय है। तभी तो ये कुशल उद्यमी बनकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए उत्साहित हैं। देश भर की स्वयं सहायता समूह से जुडी लगभग तीन सौ कुशल महिला उद्यमी के तौर पर अपने-अपने प्रदेश के हस्तशिल्प और देशी व्यंजनों को लेकर आई हैं। इनके द्वारा उत्पादित शिल्प, कलाकृतियों एवं व्यंजनों के प्रति आगंतुकों का आकर्षण देखते ही बन रहा है। लोग अपने घर-दुकान और परिवार के लिए मनपसंद उत्पादों की खूब खरीददारी कर रहे हैं। मेला परिसर में प्रवेश नि: शुल्क है।
Bihar Saras Mela 2025: आयोजन को सराहा
मंगलवार को जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने सरस मेला का जायजा लिया। उन्होंने स्वच्छता और कुशल प्रबंधन की तारीफ की। साथ ही कई गणमान्य मेला में आये उत्पादों की खरीददारी करते हुए मेला आयोजन की भरपूर सराहना भी की। इस बार आयोजन का थीम है – “हुनरमंद हाथों से सजता बिहार”। बिहार सरस मेला का आयोजन ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा किया गया है।
Bihar Saras Mela 2025: सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोह लिया
मेला परिसार में जहां एक ओर ग्रामीण हस्तशिल्प और विभिन्न उत्पादों की बहार है, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को और आकर्षक बना रहे हैं। मंगलवार को जैक गिटार क्लासेज के छात्र-छात्राओं द्वारा पुराने गीतों को आधुनिक वाद्य यंत्रो में पिरोकर प्रस्तुति की गई। “तेरा मेरा प्यार अमर है और पल-पल दिल के पास तुम रहती हो जैसे गीतों की आधुनिक यंत्रों के साथ प्रस्तुति ने दर्शकों को झुमाया। अरुण एंड ग्रुप के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत बिहार के लोक गीत एवं नृत्यों की प्रस्तुति की गई। झिझिया के तहत ‘हाली हाली बरसे इन्द्र देवता समेत अन्य लोक गीत एवं नृत्यों ने दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
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राहुल सहनी ने अपनी गायन से शमा बांधा। मंच संचालन नाजिश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका एवं कार्यक्रम सयोजन सुश्री निगम, युवा पेशेवर, जीविका ने किया। वहीं, सेमिनार कक्ष में बिहार के सभी प्रखंडों में सेवारत पशु सखियों का पांच दिवसीय क्षमतावर्धन कार्यशाला मंगलवार से शुरु हो गया। कार्यशाला का शुभारंभ डा. एन. विजयलक्ष्मी शर्मा, अपर मुख्य सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार ने किया।
शंभूकांत सिन्हा पटना
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