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Nepal Election 2026: नेपाल में RSP की लहर, RSP की जीत से भारत पर क्या पड़ेगा असर?

Nepal Election 2026: नेपाल में RSP की लहर, RSP की जीत से भारत पर क्या पड़ेगा असर?
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Nepal Election 2026: नेपाल में गुरुवार को हुए आम चुनावों के बाद, शुक्रवार देर रात वोटों की गिनती शुरू हुई। शुरुआती ट्रेंड्स से पता चलता है कि काठमांडू के पूर्व मेयर और पॉपुलर रैपर बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से भी जाना जाता है, की लीडरशिप वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) तेज़ी से आगे बढ़ रही है। अगर ये ट्रेंड्स आखिरी नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल की पॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव आ सकता है।

इस चुनाव को कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। हाल ही में नेपाल में Gen Z के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों ने देश के पॉलिटिकल सिस्टम को हिलाकर रख दिया। इन विरोध प्रदर्शनों की वजह से पिछली सरकार गिर गई और नए चुनाव कराने पड़े। इस युवा आंदोलन ने भ्रष्टाचार, पुराने पॉलिटिकल स्ट्रक्चर और धीमी आर्थिक तरक्की के खिलाफ एक नई पॉलिटिकल लहर पैदा की, जिसका फायदा RSP को मिलता दिख रहा है।

Nepal Election 2026: RSP भारत के साथ कैसा बर्ताव करेगी?

अगर RSP सत्ता में आती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई सरकार भारत के साथ कैसा बर्ताव करेगी। RSP की विदेश नीति का मूल “नेपाल फर्स्ट” है। इस पॉलिसी के तहत, पार्टी नेपाल को भारत और चीन के बीच मुकाबले का मैदान नहीं, बल्कि सहयोग का एक “जलता हुआ पुल” बनाना चाहती है। पार्टी का मानना ​​है कि अगर नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ बैलेंस्ड रिश्ते बनाए रखता है, तो इससे तीनों देशों को आर्थिक फ़ायदा हो सकता है।

RSP ने 1950 की इंडिया-नेपाल पीस एंड फ्रेंडशिप ट्रीटी में बदलाव की भी मांग की है। पार्टी का तर्क है कि यह ट्रीटी अब पुरानी हो चुकी है और इसे आज के समय के हिसाब से अपडेट करने की ज़रूरत है, ताकि दोनों देशों के बीच रिश्ते ज़्यादा ट्रांसपेरेंट, बैलेंस्ड और प्रैक्टिकल बन सकें। हालांकि, इसे इंडिया के लिए पूरी तरह से नेगेटिव सिग्नल के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। कई एनालिस्ट का मानना ​​है कि अगर समझदारी से बातचीत की जाए, तो इससे इंडिया-नेपाल के रिश्ते और मज़बूत हो सकते हैं।

RSP पार्टी का क्या हैं मकसद

अपनी नई पॉलिटिकल सोच के साथ, RSP नेपाल की इकॉनमी की तेज़ ग्रोथ पर भी ज़ोर दे रही है। पार्टी का मकसद आने वाले सालों में नेपाल को IT और एनर्जी सेक्टर का एक बड़ा हब बनाना है। नेपाल ने लगभग $30 बिलियन के IT सेक्टर का टारगेट रखा है। अगर यह प्लान सफल होता है, तो बड़ी इंडियन टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए नेपाल में इन्वेस्टमेंट और कोलेबोरेशन के नए मौके बन सकते हैं।

क्या बदलेंगे भारत-नेपाल संबंध?

नेपाल के हाइड्रोपावर रिसोर्स भी इंडिया की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी हैं। RSP सरकार भारत-नेपाल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग को और तेज़ कर सकती है। हालांकि RSP की “नेपाल फर्स्ट” पॉलिसी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर ज़ोर देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नेपाल भारत से दूरी बना लेगा। बल्कि, यह संभावना है कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ बैलेंस्ड रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करेगा।

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कुल मिलाकर, अगर RSP सत्ता में आती है, तो यह नेपाल की पॉलिटिक्स में एक नई शुरुआत हो सकती है। यह बदलाव न केवल भारत के लिए एक चुनौती बन सकता है, बल्कि नए मौकों का भी संकेत दे सकता है।

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