Bihar News: शाहपुर प्रखंड से एक भावपूर्ण और अनूठी कहानी सामने आई है, जो रिश्तों की गहराई को उजागर करती है। दिवंगत डॉ. जनार्दन पांडे की पत्नी कौशल्या देवी की अंतिम विदाई यात्रा ने पूरे इलाके का ध्यान आकर्षित किया। आमतौर पर अंतिम यात्रा का माहौल गमगीन होता है, लेकिन यह विदाई शोक, सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का एक अनूठा संगम थी।
यात्रा ने सबको किया भावुक
कौशल्या देवी लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं। धनबाद में इलाज के दौरान 23 अप्रैल को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो परिवार के पोते-पोतियों ने एक ऐसा निर्णय लिया जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने अपनी दादी की विदाई को यादगार और भव्य बनाने का संकल्प लिया, ताकि उनके जीवन और मूल्यों को हमेशा याद रखा जा सके।
शुक्रवार को निकाली गई अंतिम यात्रा लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी थी। सड़क पर नजारा ऐसा था मानो किसी बड़े राजनेता का काफिला या किसी शाही शादी की बारात हो। सैकड़ों छोटी-बड़ी गाड़ियां कतार में चल रही थीं, वहीं 15 बैंड पार्टियां और डीजे भजन और धुनों के साथ पूरे रास्ते वातावरण को भावनात्मक बनाए हुए थे। इस अंतिम यात्रा में आधुनिक तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया गया. करीब 50 ड्रोन कैमरों से पूरी यात्रा की कवरेज की गई और 20 प्रोफेशनल वीडियोग्राफरों ने हर पल को रिकॉर्ड किया।
दादी को दी भव्य विदाई
कौशल्या देवी के पोता, गणेश पांडे, रमेश पांडे, मंटू पांडे और बिट्टू पांडे ने भावुक होकर बताया कि उनकी दादी सिर्फ परिवार की बुजुर्ग नहीं थीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत थीं। उन्होंने जीवन के जो मूल्य और संस्कार दिए, वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं। इसी सम्मान और प्रेम को व्यक्त करने के लिए उन्होंने यह भव्य विदाई दी।
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यह अंतिम यात्रा महज विदाई से कहीं बढ़कर, पीढ़ियों को जोड़ने वाले अटूट बंधन और प्रेम का प्रतीक बन गई। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा सम्मान दिल से दिया जाता है, न केवल जीवन में, बल्कि विदाई के समय भी।
















