NITI Aayog Meeting: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और संसाधनों पर अधिकारों से जुड़े कई अहम मुद्दे ज़ोर-शोर से उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को सिर्फ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के तौर पर नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक, शैक्षिक और मानव संसाधन विकास के भविष्य के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए।
NITI Aayog Meeting: स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र से मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है। उन्होंने बताया कि झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में 220 और अंडरग्रेजुएट (UG) और 217 पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों के प्रस्ताव अभी पेंडिंग हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन प्रस्तावों को जल्द मंज़ूरी देने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने PPP मॉडल के तहत प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में से बाकी बचे दो कॉलेजों को भी जल्द मंज़ूरी देने की मांग की।
केवल खनिज संपदा से नहीं होगा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के औद्योगिक विकास में झारखंड ने अहम भूमिका निभाई है। राज्य के कोयले, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया है; हालाँकि, इसके बदले में झारखंड को विस्थापन, पर्यावरण पर दबाव और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों के अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल खनिज संपदा के आधार पर विकास हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण को प्राथमिकता देना ज़रूरी है।
शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
हेमंत सोरेन ने बताया कि राज्य में लगभग 38,000 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से 15,000 के पास अभी भी अपनी इमारतें नहीं हैं। इसके बावजूद, ‘पोषण अभियान’ और राज्य सरकार की ‘समर’ (SAMAR) योजना के कारण कुपोषण और बच्चों के विकास में रुकावट (स्टंटिंग) की समस्या में काफी कमी आई है। केंद्र सरकार से सहयोग मांगते हुए उन्होंने बताया कि राज्य अपने संसाधनों से 5,000 नई आंगनवाड़ी इमारतें बना रहा है। साथ ही, ‘मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस’ योजना के तहत छात्रों को IIT, मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला दिलाने में मदद करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने झारखंड में पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग भी रखी।
रोजगार और कौशल विकास पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार हर साल एक लाख से ज़्यादा युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोज़गार से जोड़ रही है। अब तक ‘मुख्यमंत्री सारथी योजना’ के तहत 6.76 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि खेती, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सोलर एनर्जी जैसे सेक्टर में ट्रेनिंग दी जा रही है। राज्य सरकार इस काम के लिए हर साल ₹1,400 करोड़ से ज़्यादा खर्च कर रही है। इसके अलावा, एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से ₹1,200 करोड़ की लागत से एक बड़ा स्किलिंग इकोसिस्टम भी बनाया जा रहा है।
खेल विश्वविद्यालय और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने हॉकी, फ़ुटबॉल, क्रिकेट, तीरंदाज़ी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। राज्य ने देश को कई अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने झारखंड में हॉकी और फ़ुटबॉल के लिए राष्ट्रीय स्तर के ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ और एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने की बात कही। साथ ही, उन्होंने खेल संघों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सुधारों का सुझाव भी दिया।
जल जीवन मिशन और बकाया राशि का मुद्दा
हेमंत सोरेन ने जल जीवन मिशन के तहत लगभग ₹6,000 करोड़ की रुकी हुई धनराशि को तुरंत जारी करने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने कोयला कंपनियों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ओर से झारखंड को देय ₹1.36 लाख करोड़ की बकाया राशि का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर राज्य को ये फंड मिलते हैं, तो इनका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जा सकता है, जिससे लाखों लोगों को सीधा लाभ होगा।
‘झारखंड को विकास का भागीदार बनाया जाए’
अपने संबोधन के आखिर में, मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना तभी सच हो पाएगा जब झारखंड जैसे राज्यों को सिर्फ़ संसाधनों के स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि विकास में बराबर के साझेदार के तौर पर देखा जाए। उन्होंने नीति आयोग से झारखंड के लिए लंबे समय का विकास विज़न बनाने और राज्य की खनिज संपदा को मानव पूंजी में बदलने में मदद करने का आग्रह किया।
आज नई दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी की अध्यक्षता में आयोजित @NITIAayog की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में झारखंड की 4 करोड़ से अधिक जनता की आकांक्षाओं को रखने का अवसर मिला। बैठक का विषय “Inclusive Human Development for Vikasit Bharat @2047” था।… pic.twitter.com/DW6gUVdqa5
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 11, 2026
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