TMC Crisis : पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अब खुलकर सामने आने लगी है। बढ़ती अंदरूनी नाराजगी के बीच, कई सांसदों और विधायकों के बागी रुख ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल ही में आई खबरों से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है कि 19 लोकसभा सांसदों, जिनमें वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय भी शामिल हैं, यह सभी ने अलग पहचान की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से बैठने की अलग व्यवस्था करने और एक स्वतंत्र समूह के तौर पर मान्यता देने का अनुरोध किया है। इससे पार्टी के भीतर बढ़ती दरार का संकेत मिलता है।
TMC Crisis: बागी सांसदों की सूची ने बढ़ाई चर्चा
सामने आई लिस्ट में सायनी घोष और यूसुफ पठान जैसे कई प्रमुख सांसदों के नाम शामिल हैं। हालांकि, अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ़ किया है कि वह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के साथ मज़बूती से खड़े हैं और किसी भी बागी गुट का हिस्सा नहीं हैं। बागी गुट ने यह भी संकेत दिया है कि लोकसभा में अलग बैठने की मांग सिर्फ़ संसदीय प्रक्रिया का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन के भीतर असंतोष को भी दर्शाता है। तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता राज्यसभा से इस्तीफ़ों का सिलसिला है। पहले सुखेंदु शेखर रॉय, फिर सुष्मिता देव और उसके बाद प्रकाश चिक बारिक ने अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी। घटनाओं का यह क्रम पार्टी के भीतर बढ़ती नाराज़गी की ओर इशारा करता है। इस्तीफ़ा देने के बाद, प्रकाश चिक बारिक ने कहा कि उन्होंने यह फ़ैसला पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश और मौजूदा राजनीतिक हालात को ध्यान में रखते हुए लिया है।
विधानसभा में भी दिख रही है नाराजगी
बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने किसी भी अन्य दल के साथ विलय की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक मामला है। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट को दर्जनों विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे अपनी स्थिति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि कुछ बागी सांसदों की बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकातों के बाद NDA के साथ संभावित गठबंधन की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। हालाँकि, अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन या विलय की घोषणा नहीं की गई है। जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पालन करना होगा।
TMC Crisis: ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद, तृणमूल कांग्रेस पहली बार संगठन के स्तर पर गंभीर संकट का सामना करती दिख रही है। सांसदों और विधायकों की नाराज़गी पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं, क्या नाराज़ नेताओं को वापस पार्टी में लाया जा सकेगा या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोई नया राजनीतिक समीकरण बनेगा।
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