70th BPSC Result: 70वीं BPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आने के बाद, बिहार स्टूडेंट यूनियन (BSU) ने परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, यूनियन के अध्यक्ष और छात्र नेता दिलीप कुमार ने आरोप लगाया कि परीक्षा में हिंदी भाषी और बिहारी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया गया।
70th BPSC Result: 70वीं BPSC रिजल्ट पर बड़ा विवाद
दिलीप कुमार ने बताया कि पहले भी कई बार ऐसा हुआ है जब हिंदी भाषी उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा के 300 नंबर वाले निबंध के पेपर में 200 या उससे ज़्यादा नंबर हासिल किए हैं। हालांकि, 70वीं BPSC मुख्य परीक्षा के लिए कथित तौर पर एक निर्देश जारी किया गया था, जिसके तहत अगर निबंध में 180 से ज़्यादा नंबर मिलते हैं, तो मुख्य परीक्षक से उत्तर पुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन करवाना ज़रूरी था। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था से मूल्यांकन करने वालों की आज़ादी प्रभावित हुई और हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बार हिंदी-माध्यम के उम्मीदवारों के लिए निबंध की उत्तर-पुस्तिकाओं में अलग-अलग संकेत दिए गए थे, जबकि पिछली परीक्षाओं में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
चयन में बाहरी अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने का दावा
बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष ने बताया कि 549 अनारक्षित सीटों में से बिहार के केवल 216 उम्मीदवार चुने गए जो कुल संख्या का लगभग 40 प्रतिशत है। इसके विपरीत, उनके अनुसार, 333 उम्मीदवार यानी लगभग 60 प्रतिशत बिहार के बाहर के हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि बिहार से उम्मीदवारों के चयन में लगातार गिरावट क्यों आ रही है। दिलीप कुमार ने निष्पक्ष जांच की मांग की ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस ट्रेंड के लिए शिक्षा प्रणाली, कोचिंग कल्चर या किसी अन्य तरह की अनियमितता जिम्मेदार है।
सरकार और बीपीएससी से जांच की मांग
दिलीप कुमार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश दें। साथ ही, उन्होंने BPSC से यह डेटा सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया है कि सफल उम्मीदवारों में से कितने लोगों ने बिहार के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई की है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया के दौरान कोई भेदभाव हुआ है, तो हिंदी भाषी और बिहारी उम्मीदवारों को न्याय दिलाने के लिए उसे ठीक किया जाना चाहिए।
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