Grocery Price Increase: देश की प्रमुख फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियों को आने वाले महीनों में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। यस सिक्योरिटीज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका सीधा असर साबुन, शैम्पू, खाने के तेल, पैक्ड फूड, डिटर्जेंट और घर में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में रॉ मटीरियल महंगाई सूचकांक में साल-दर-साल 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले, अप्रैल में यह बढ़ोतरी 9.7 प्रतिशत थी। हर महीने लागत भी लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनियों के लिए प्रोडक्शन करना और महंगा होता जा रहा है।
Grocery Price Increase: कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
FMCG कंपनियों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल इंडेक्स में साल-दर-साल लगभग 58 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन पर उनके असर के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से पैकेजिंग, प्लास्टिक, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ रही है। एल्काइल बेंजीन जैसे कच्चे माल भी पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं।
खाद्य तेल भी लगातार महंगे
पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल प्रोग्राम की वजह से पाम ऑयल की ग्लोबल मांग बढ़ी है, जिससे कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। वहीं, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल की कीमत में भी साल-दर-साल आधार पर लगभग 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर बिस्कुट, स्नैक्स, नमकीन, बेकरी प्रोडक्ट्स, रेडी-टू-ईट फूड और दूसरे पैक्ड फूड आइटम्स की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना है।
चाय और दूध महंगे, कोको में राहत
खेती से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में मिला-जुला रुख देखा गया है। चाय की पत्तियों और दूध की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि बेहतर उत्पादन के कारण कोको और खोपरे की कीमतों में गिरावट आई है। इससे चॉकलेट और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से इम्पोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल की लागत और बढ़ गई है। कंपनियों को अब डॉलर के हिसाब से ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं और साथ ही ग्लोबल मार्केट में भी कच्चा माल ऊँची कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है। इसका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफ़िट मार्जिन पर पड़ रहा है।
ग्राहकों पर पड़ सकता है असर
जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे माल की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो FMCG कंपनियां बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा सकती हैं। कुछ कंपनियां कीमतें बढ़ाने के बजाय ‘श्रिंकफ्लेशन’ (यानी पैक का साइज़ कम करने) का रास्ता भी अपना सकती हैं। आने वाले महीनों में साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट, पैक्ड फूड, खाने के तेल और रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीज़ों की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में, आम ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है।
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