Indian Space Economy 2026: भारत की स्पेस इकॉनमी तेज़ी से बढ़ रही है। सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार देश की स्पेस इकॉनमी लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। मज़बूत स्टार्टअप इकोसिस्टम, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और पॉलिसी में सुधारों की वजह से अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है।
Indian Space Economy 2026: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में ज़बरदस्त उछाल
रविवार को मनाए गए ‘नेशनल स्पेस डे’ के आस-पास जारी किए गए आंकड़े भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे स्पेस सेक्टर की तस्वीर पेश करते हैं। जहाँ 2014 में देश में केवल एक रजिस्टर्ड स्पेस स्टार्टअप था, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 440 हो गई है। यह साफ़ तौर पर दिखाता है कि स्पेस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
स्पेस सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में ज़बरदस्त उछाल आया है। जहाँ 2021-22 फाइनेंशियल ईयर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट लगभग $100.5 मिलियन था, वहीं 31 मार्च, 2026 तक यह बढ़कर $618.5 मिलियन हो गया। अकेले 2026 में ही लगभग $187 मिलियन का इन्वेस्टमेंट किया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को कुल 113 मंज़ूरियां दी गई थीं। इनमें से 18 स्टार्टअप सैटेलाइट ऑपरेशन, पेलोड और लॉन्च सर्विस जैसी गतिविधियों में शामिल हैं।
भारत ने 2020 में अपने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया। इससे सैटेलाइट बनाने, लॉन्च सिस्टम और स्पेस एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट इंडस्ट्री की भागीदारी बढ़ी। ‘इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023’ ने इस प्रक्रिया को और मज़बूत किया और स्पेस वैल्यू चेन में प्राइवेट कंपनियों की बड़ी भूमिका के लिए रास्ता बनाया।
1 से 440 हुए स्पेस स्टार्टअप, निवेश भी बढ़ा
ISRO की कमर्शियल शाखा, NSIL, लॉन्च, सैटेलाइट और स्पेस से जुड़ी सेवाएं देने के साथ-साथ ISRO की टेक्नोलॉजी को भारतीय इंडस्ट्री तक पहुंचाने का काम करती है। NSIL का रेवेन्यू 2021-22 फाइनेंशियल ईयर में ₹321.77 करोड़ से बढ़कर 2024-25 फाइनेंशियल ईयर में ₹3,000 करोड़ से ज़्यादा हो गया।
इस बीच, IN-SPACe एक सिंगल-विंडो सिस्टम के ज़रिए प्राइवेट स्पेस गतिविधियों को बढ़ावा देता है। 31 जनवरी 2026 तक, इस सिस्टम के ज़रिए ISRO की 71 टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को ट्रांसफर की जा चुकी थीं। स्पेस सेक्टर में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए फरवरी 2024 में FDI नियमों में भी बदलाव किए गए। सैटेलाइट बनाने और उनके ऑपरेशन में 74% तक, लॉन्च व्हीकल और स्पेसपोर्ट में 49% तक, और सैटेलाइट व ग्राउंड-सेगमेंट के पार्ट्स में 100% तक FDI की अनुमति है।
अगले दशक में 45 अरब डॉलर का लक्ष्य
सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए कई फाइनेंशियल स्कीमें भी शुरू की हैं। IN-SPACe सीड फंड शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को मदद देता है। वहीं, ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड और ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड, स्पेस टेक्नोलॉजी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम हैं। पिछले तीन सालों में खासकर जुलाई 2023 से जून 2026 के बीच भारत ने सफलतापूर्वक 12 लॉन्च व्हीकल मिशन पूरे किए।
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इनमें देश और विदेश के ग्राहकों के लिए कई सैटेलाइट शामिल थे। भारत का स्पेस सेक्टर अब सिर्फ़ सरकारी प्रोग्राम तक ही सीमित नहीं है। स्टार्टअप, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, नई पॉलिसी और टेक्नोलॉजी में तरक्की की वजह से भारत तेज़ी से एक मज़बूत और कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
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