Jharkhand Student Politics: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का रूप ले रहा है। इस मामले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर बीजेपी सांसदों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को सीधे चुनौती दी और कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार से कांग्रेस का समर्थन वापस ले लें।
Jharkhand Student Politics: छात्र आंदोलन पर बीजेपी का बड़ा वार
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि पिछले सात सालों से झारखंड में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर राज्य के फंड की लूट से पार्टी चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस में हेमंत सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की न तो हिम्मत है और न ही हैसियत।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश को तोड़ने वाली ताकतों का साथ दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि झारखंड में छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई पर राहुल गांधी और कांग्रेस चुप क्यों हैं। बीजेपी सांसद ने कहा कि राज्य अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक इस पूरे मामले की CBI जांच नहीं हो जाती।
विरोध-प्रदर्शन के दौरान, बीजेपी सांसद नारे लिखे हुए प्लेकार्ड भी लिए हुए दिखे। इन नारों में JPSC और JSSC-CGL भर्ती में कथित गड़बड़ियों, झारखंड के छात्रों से कांग्रेस पार्टी द्वारा माफ़ी मांगने की मांग और हेमंत सरकार के इस्तीफ़े की मांग जैसे मुद्दे उठाए गए।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को घेरा
असल में, छात्र लगभग 20 दिनों से JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाएं रद्द की जाएं और पूरे मामले की CBI जांच हो। 9 अगस्त को सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन उसके बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
बीजेपी का आरोप है कि विधानसभा के घेराव के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जबकि कांग्रेस और राहुल गांधी ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी है। बीजेपी अब इस मुद्दे पर सरकार और कांग्रेस दोनों पर दबाव बनाने की रणनीति बना रही है और अपने अभियान को संसद से झारखंड तक ले जा रही है। छात्रों के आंदोलन से जुड़ी यह राजनीतिक लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।
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