Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---
Advertisement
Ad
---Advertisement---
Advertisement
Ad

Shardiya Navratri 2026: हाथी पर आएंगी मां दुर्गा, जानें किस वाहन पर होगी विदाई

शारदीय नवरात्रि का त्योहार देवी दुर्गा की पूजा, शक्ति (दैवीय शक्ति) की आराधना और आत्म-संयम का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और देवी भगवती की पूजा-अर्चना करते हैं।

Shardiya Navratri 2026: हाथी पर आएंगी मां दुर्गा, जानें किस वाहन पर होगी विदाई
---Advertisement---

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का त्योहार देवी दुर्गा की पूजा, शक्ति (दैवीय शक्ति) की आराधना और आत्म-संयम का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और देवी भगवती की पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष, देवी दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ व्रत के नियमों को लेकर भी चर्चा हो रही है।

रांची के जाने-माने विद्वान पंडित पांडे ने नवरात्रि से जुड़ी कई अहम बातें बताईं। उन्होंने भक्तों से अपील की कि वे दिखावे से दूर रहकर सच्चे मन से देवी की पूजा करें और समाज की शांति व भलाई के लिए प्रार्थना करें।

Shardiya Navratri 2026: हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन

पंडित मृत्युंजय पांडे के अनुसार, इस साल शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा हाथी यानी ‘गज’ पर सवार होकर आ रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथी पर देवी का आगमन शुभ माना जाता है; इसे अच्छी बारिश, बेहतर खेती और समृद्धि की उम्मीद से जोड़ा जाता है।

हालाँकि, देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन का निर्धारण पारंपरिक पंचांग में सप्ताह के दिन और उससे जुड़ी तारीखों के आधार पर किया जाता है। इन बातों को धार्मिक आस्था के विषयों के रूप में समझा जाना चाहिए।

विदाई के वाहन को लेकर क्या है मान्यता?

पंडित मृत्युंजय पांडेय ने बताया कि पंचांग के अनुसार, इस बार देवी दुर्गा की विदाई के लिए मुर्गे को सवारी के तौर पर बताया गया है, हालाँकि, कुछ विद्वान इसे पैदल विदाई के रूप में भी देखते हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुर्गे पर सवार होकर विदा होना शुभ संकेत नहीं माना जाता है।

ऐसी मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध सामाजिक परेशानियों, बीमारियों और चुनौतियों से माना जाता है। कुछ धार्मिक व्याख्याओं में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक तनाव की संभावना का भी ज़िक्र है। हालाँकि, ये धार्मिक मान्यताएँ और पारंपरिक व्याख्याएँ हैं, इनके आधार पर बीमारी, युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता के बारे में पक्की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

नवरात्र के नौ दिनों में कैसे रखें व्रत?

पंडित मृत्युंजय पांडे के अनुसार, नवरात्रि में व्रत रखने से जुड़ी कई परंपराएँ प्रचलित हैं। कुछ भक्त नौ दिनों तक केवल फलों का सेवन करते हैं, जबकि अन्य लोग तय समय पर सात्विक भोजन करते हैं। व्रत शुरू करने से पहले पूजा की विधि और अपना संकल्प तय करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

उन्होंने बताया कि अगर कोई भक्त पूरे नौ दिनों तक फलों का आहार (फलाहार) लेने का संकल्प लेता है, तो उसे परंपरा के अनुसार पूरे समय इस नियम का पालन करना चाहिए। इसी तरह, अगर कोई व्रत के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल करने का संकल्प लेता है, तो व्रत की पूरी अवधि के दौरान उसी नियम का पालन किया जाता है।

जो भक्त पहली बार व्रत रख रहे हैं, उन्हें अपनी शारीरिक सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें ज़रूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रहना चाहिए। अगर किसी खास धार्मिक रीति-रिवाज़ को लेकर कोई उलझन हो, तो किसी जानकार पुजारी से सलाह ली जा सकती है।

ये भी पढ़ें- Nana Patekar Death: नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार संपन्न, बेटे मल्हार ने दी मुखाग्नि

ये भी पढ़ें- Prashant Kishor Darbhanga: दरभंगा में PK का चुनाव आयोग पर हमला

Hemant Kumar

Hemant Kumar is a dynamic Darbhanga-based journalist and the visionary founder of Mithila Top. With five years of impactful reporting across politics, society, education, and entertainment, he is celebrated for his signature writing style... masterfully delivering factually precise, lucid, and engaging narratives that make him a trusted voice in regional journalism.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment