Vishwakarma Puja 2026: देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम अपने धार्मिक और पौराणिक महत्व के लिए देश-दुनिया में मशहूर है। यहाँ बाबा बैद्यनाथ मंदिर जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इसके अलावा एक शक्तिपीठ (देवी शक्ति को समर्पित एक पवित्र तीर्थस्थल) भी स्थित है। इसी वजह से मंदिर परिसर से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताएँ और कथाएँ देवघर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं।
Vishwakarma Puja 2026: मंदिर निर्माण से जुड़ी मान्यताएं जानिए
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और वास्तुकला व निर्माण का देवता माना जाता है। बैद्यनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं में भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकारी का ज़िक्र मिलता है। माना जाता है कि मंदिर परिसर के भीतर के पाँच मुख्य मंदिरों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था, इनमें बाबा बैद्यनाथ मंदिर, माता शक्ति मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि शामिल हैं।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के वरिष्ठ पुजारी और ज्योतिषी बाबा झलक ने मीडिया को बताया की भगवान विश्वकर्मा ने मंदिर का निर्माण जिस मूल रूप में किया था, वह आज भी वैसा ही है। वे बताते हैं कि मंदिर के निर्माण से जुड़ी कुछ ऐसी मान्यताएँ हैं, जिनकी चर्चा आज भी श्रद्धालुओं के बीच होती है।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, गर्भगृह में दूसरा रास्ता या दरवाज़ा बनाने की कोशिशें भी की गई थीं। बाबा झलक के मुताबिक, ये कोशिशें नाकाम रहीं। उनका दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान दीवार से कोई लाल पदार्थ रिसता हुआ देखा गया, जिसके कारण काम रोक दिया गया। हालाँकि, यह धार्मिक आस्था का विषय है और इसकी कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अधूरा क्यों रह गया लक्ष्मी नारायण मंदिर?
वही मंदिर परिसर में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी है। भक्तों के बीच यह मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा इस मंदिर का निर्माण कर रहे थे, तभी सुबह हो गई और निर्माण अधूरा रह गया। बाबा बैद्यनाथ धाम आए श्रद्धालु भी मंदिर की बनावट और उससे जुड़ी मान्यताओं की बहुत तारीफ़ करते हैं। श्रद्धालु का कहना है कि मंदिर परिसर में भगवान विश्वकर्मा की कारीगरी से जुड़ी कहानियों का एहसास आज भी किया जा सकता है।
विश्वकर्मा पूजा में क्यों हैं आकर्षण का केंद्र ?
वहीं मंदिर के मजिस्ट्रेट कमलेश कुमार के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के मौके पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसे देखते हुए ज़िला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम करते हैं। विश्वकर्मा पूजा के मौके पर बाबा बैद्यनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक कथाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला और उससे जुड़ी मान्यताएं देवघर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।
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