Jharkhand HC: झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को राज्य सरकार के कई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने के फ़ैसले पर एक अहम सुनवाई हुई। इन प्रक्रियाओं में 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL, CDPO और फ़ूड सेफ़्टी ऑफ़िसर (FSO) के पद शामिल थे। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने चुने गए उम्मीदवारों को दी गई अंतरिम राहत को बरकरार रखा है, इसका मतलब है कि सरकार के रद्द करने के आदेश पर लगी रोक जारी रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
Jharkhand HC: रद्दीकरण पर रोक बरकरार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को ध्यान में रखकर लिया गया था। इससे पहले हाई कोर्ट ने सरकार से उन खास तथ्यों को स्पष्ट करने को कहा था जो जांच के दौरान सामने आए थे और जिनके आधार पर इतने बड़े पैमाने पर नियुक्तियों और परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया।
सरकार के जवाब के बाद, याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से जवाब का जवाब (rejoinder) दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर के लिए तय कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अब तक सामने आए तथ्यों पर मौखिक टिप्पणियां भी कीं। कोर्ट ने कहा कि भले ही ऐसा लगता है कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह से सही तरीके से नहीं की गई थीं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर नियुक्ति अमान्य है। इस मामले में नियुक्त किए गए उम्मीदवारों के लिए यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पूर्व जज करेंगे SIT-CID जांच की मॉनिटरिंग
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि जांच के दौरान SIT ऐसे कई उम्मीदवारों से पूछताछ कर रही है जिनका किसी भी अनियमितता से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि निर्दोष उम्मीदवारों को बेवजह परेशान न होना पड़े, जांच की निगरानी ज़रूरी है। इस दलील के बाद हाई कोर्ट ने SIT/CID की जांच की निगरानी के लिए पूर्व जज गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया। अब जांच की प्रक्रिया रिटायर्ड जज की देखरेख में होगी।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील राजीव रंजन, इंद्रजीत सिन्हा, प्रेरणा झुनझुनवाला, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष और अन्य पेश हुए। राज्य सरकार की ओर से मीनाक्षी अरोड़ा और एडवोकेट जनरल रोहिताश्व रॉय ने दलीलें पेश कीं, जबकि JPSC की ओर से वकील संजय पिपरवाल और उनके सहयोगी प्रिंस कुमार पेश हुए।
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