Darbhanga News: मिथिला की भाषा, साहित्य और संस्कृति के साथ लगातार हो रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार के विरोध में आज मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने बेनिपुर ब्लॉक मुख्यालय के सामने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। ब्लॉक अध्यक्ष गौतम झा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य सड़क पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया और पूरा इलाका सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा।
हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने मैथिली अकादमी को बंद करने, मिथिला की संस्थाओं की उपेक्षा, उसकी भाषा और संस्कृति की अनदेखी और इन मुद्दों पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। “मैथिली अकादमी का बंद होना सिर्फ़ एक दफ़्तर का बंद होना नहीं, यह मिथिला का अपमान है,” “मिथिला को उसका हक दो”, “भाषा-संस्कृति की हत्या बंद करो” जैसे नारों से वातावरण पूरी तरह आंदोलित रहा।
इस मौके पर संतोष साहू, गोपाल झा, दीपक वत्स, शिवम झा, नीतीश वत्स, दिलीप पासवान, अरविंद यादव, अमित शर्मा और धनंजय कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने सर्वसम्मति से सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मिथिला, जिसने सदियों से बिहार को पहचान दी है, आज उसी की सबसे ज़्यादा उपेक्षा की जा रही है।
मिथिला की भाषा, साहित्य और पहचान पर सीधा हमला-गौतम झा
सभा को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष गौतम झा ने कहा कि मैथिली अकादमी जैसी प्रतिष्ठित संस्था का बंद होना सिर्फ़ एक दफ़्तर का बंद होना नहीं, बल्कि मिथिला की भाषा, साहित्य और पहचान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि 1976 में स्थापित मैथिली अकादमी ने सैकड़ों किताबें प्रकाशित कीं और मैथिली को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, लेकिन कर्मचारियों की कमी, बजट की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसका बंद होना सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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मिथिला के नेता गोपाल झा ने चेतावनी दी कि बेनिपुर की साहित्यिक धरती से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पटना तक फैलेगा। उन्होंने घोषणा की कि जब तक मैथिली अकादमी को फिर से नहीं खोला जाता, स्थायी नियुक्तियां नहीं की जातीं और मिथिला को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन और तेज़ होगा। उन्होंने साफ कहा कि मिथिला के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मांग की कि सरकार मिथिला की भाषा और संस्कृति के लिए अपना समर्थन सिर्फ़ राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित न रखे, बल्कि ठोस नीतियों और संस्थागत समर्थन के ज़रिए इसे मज़बूत करे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार समय रहते उनकी चेतावनियों पर ध्यान नहीं देती है, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में फैल जाएगा, जिसके लिए सरकार पूरी तरह ज़िम्मेदार होगी।
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मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने साफ़ किया कि यह संघर्ष किसी खास व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि मिथिला के अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए है, और इस संघर्ष को इसके निर्णायक अंजाम तक पहुँचाया जाएगा।













