Bihar Cabinet Expansion 2026: गुरुवार का दिन बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण दिन साबित हुआ, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार संपन्न हुआ। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार के माध्यम से एनडीए ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उसने सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया है।
बिहार कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री
नए मंत्रिमंडल में भाजपा और जेडीयू के बीच स्पष्ट संतुलन झलकता है। भाजपा के कोटे में 15 मंत्री थे, जबकि जेडीयू के हिस्से में 13 मंत्री थे। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के दो नेताओं को मंत्री पद मिले। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक मंत्री पद प्राप्त हुआ।
इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सबसे बड़ी चर्चा नए चेहरों को शामिल करने को लेकर थी। पहली बार जेडीयू ने निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता जैसे नेताओं पर भरोसा जताया। विशेष रूप से निशांत कुमार की नियुक्ति राजनीतिक हलकों में काफी बहस का विषय रही। श्वेता गुप्ता की मंत्री नियुक्ति महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संदेश देती है।
भाजपा ने नए सामाजिक समीकरण बनाने की रणनीति के तहत मिथिलेश तिवारी, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और इंजीनियर शैलेंद्र जैसे नए चेहरों को भी मैदान में उतारा है। पार्टी ने चुनाव से पहले अपने समर्थन आधार को और मजबूत करने के लिए विभिन्न जातियों और सामाजिक समूहों तक पहुंचने का प्रयास किया है।
Bihar Cabinet Expansion 2026:दलित और महिलाओं पर खास फोकस
मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया। नए मंत्रिमंडल में अधिकतम 10 मंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) समुदाय से हैं। इसके अलावा, ओबीसी समुदाय से छह, दलित समुदाय से सात और उच्च जाति से नौ मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। एनडीए ने मुस्लिम समुदाय से एक मंत्री को शामिल करके भी संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है।
महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो सम्राट मंत्रिमंडल में कुल पांच महिला मंत्री हैं, जिनमें से सबसे अधिक तीन महिलाएं जेडीयू (JDU) से हैं। यह स्पष्ट रूप से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित थे। गांधी मैदान में हजारों समर्थक जमा हुए और इस पूरे आयोजन को एनडीए की शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया।
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अब इस मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, नई सरकार के सामने विकास योजनाओं को लागू करने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। लेकिन यह निश्चित है कि इस विस्तार के माध्यम से एनडीए ने बिहार की राजनीति में अपनी चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
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