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Malmas Mela 2026: राजगीर में साधु-संतों का भव्य शाही स्नान शुरू

Malmas Mela 2026: राजगीर में साधु-संतों का भव्य शाही स्नान शुरू
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Malmas Mela 2026: राजगीर मलमास मेले के शुभ अवसर पर आज राजगीर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। मेले के पहले राजगीर स्नान के दौरान, देश भर से हजारों संत और श्रद्धालु पवित्र तालाबों में स्नान करने पहुंचे। धार्मिक मंत्रों, भक्ति गीतों और शंखों की ध्वनि से पूरा राजगीर क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ था। जिला प्रशासन और मेला प्रशासन ने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की थीं।

Malmas Mela 2026: अखाड़े से निकला शाही जुलूस

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, शाही स्नान के लिए भव्य जुलूस उदासीन अखाड़े से शुरू हुआ। इसके बाद, विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के संत और ऋषि स्नान के लिए रवाना हुए। खाक चौक, बड़ी संगत, धनिया पहाड़ी संगत, राजाउली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा और सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा सहित कई प्रमुख अखाड़ों और संप्रदायों के महंतों और संतों ने इस आयोजन में भाग लिया।

शांतिपूर्ण और व्यवस्थित राजस्खलन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की। प्रत्येक अखाड़ा और जत्थे में एक मजिस्ट्रेट और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रहा है।

पवित्र स्नान अनुष्ठान सुबह लगभग 6 बजे ब्रह्म मुहूर्त (दिव्य समय) में शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे तक चला। संतों और ऋषियों ने सर्वप्रथम गुरु नानक कुंड में स्नान किया। इसके बाद उनका समूह सरस्वती नदी, सप्तधारा और अंत में मुख्य ब्रह्म कुंड की ओर बढ़ा, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच स्नान अनुष्ठान संपन्न हुआ।

उमड़ा आस्था का सैलाब

मेले के प्रशासन ने संतों और आम श्रद्धालुओं दोनों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। संतों और ऋषियों के लिए मुख्य द्वार से तालाब तक अलग से व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें कतारों में इंतजार न करना पड़े। आम श्रद्धालुओं को राहत देते हुए प्रशासन ने फैसला किया कि दो अखाड़ा समूहों के बीच के अंतराल में आम लोग भी तालाब में स्नान कर सकेंगे। इससे हजारों श्रद्धालुओं को पवित्र स्नान करने का अवसर मिला।

विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। हर तीन साल में आयोजित होने वाला यह मेला देशभर से श्रद्धालुओं और संतों को एक साथ लाता है। इस बार भी राजगीर में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

नालंदा से संजीव कुमार बिट्टु की रिपोर्ट

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