Brahmakund Rajgir: नालंदा ज़िले के राजगीर में, ज़िला मजिस्ट्रेट ने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले ब्रह्मकुंड परिसर का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, परिसर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जनेऊ भवन की नींव की खुदाई के दौरान प्राचीन कलाकृतियां मिली हैं, जिनका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, ज़िला प्रशासन ने इन प्राचीन वस्तुओं की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सूचित करने का फ़ैसला किया है। ASI की एक विशेषज्ञ टीम मिली हुई चीज़ों की प्राचीनता, ऐतिहासिक महत्व और असलियत की जांच करेगी।
Brahmakund Rajgir: प्राकृतिक जलधाराओं के सूखने पर सख्त हुईं DM
ज़िला मजिस्ट्रेट ने साफ़ किया कि अगर ASI की जांच में यह जगह पुरातात्विक महत्व की पाई जाती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अगर जांच में ऐसा कोई महत्व नहीं पाया जाता है, तो ब्रह्मकुंड परिसर में चल रहा विकास कार्य पहले से तय योजना के अनुसार जारी रहेगा। निरीक्षण के दौरान, स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने ज़िला प्रशासन के सामने ब्रह्मकुंड इलाके में प्राकृतिक जल-धाराओं के लगातार सूखने का मुद्दा उठाया। लोगों ने बताया कि कई प्राकृतिक धाराएँ, जो साल भर बहती थीं, अब सूख चुकी हैं। उन्होंने इसका मुख्य कारण ज़मीन के नीचे से बहुत ज़्यादा पानी निकालना और आस-पास के इलाकों में निजी बोरवेल की बढ़ती संख्या को बताया।
अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक के निर्देश
जिला पदाधिकारी ने इस मामले को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च-स्तरीय शोध समिति बनाने की घोषणा की। इसके अलावा, वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर ज़रूरी कदम उठाने और संरक्षण के प्रयासों की देखरेख के लिए एक अलग कार्य समिति का गठन किया जाएगा। जिला पदाधिकारी ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि वे ब्रह्मकुंड और आस-पास के इलाकों में चल रहे सभी अवैध बोरवेल ऑपरेशन्स को तुरंत रोक दें। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए। प्रशासन का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा, दोनों ही राजगीर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इसलिए, विकास कार्यों के साथ-साथ धरोहर और पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी।
नालंदा से संजीव कुमार बिट्टु की रिपोर्ट
यह भी पढ़ें:


















