PMCH Nurses Strike: मंगलवार को राज्य की राजधानी पटना के पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में भारी हंगामा हुआ। अस्पताल की स्टाफ नर्सों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर हड़ताल कर दी, जिससे इमरजेंसी सेवाओं, ऑपरेशन थिएटर के कामकाज और वार्ड में स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा। हड़ताल के कारण कई मरीज़ों को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
PMCH Nurses Strike: नर्स के पति की मौत के बाद काम बंद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विवाद इलाज के दौरान एक सीनियर स्टाफ़ नर्स के पति की मौत और उनके परिवार वालों के साथ मारपीट के आरोपों के बाद शुरू हुआ। नर्सों का आरोप है कि घटना के समय मौजूद जूनियर डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई; इसके विरोध में उन्होंने काम बंद कर दिया और अस्पताल प्रशासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, हड़ताल से सर्जिकल सेवाओं पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा। दोपहर तक सिर्फ़ 35 बड़ी सर्जरी ही हो पाईं, जबकि 63 सर्जरी टालनी पड़ीं। वहीं, इमरजेंसी वार्ड और दूसरे विभागों में भर्ती मरीज़ों को दवा, इंजेक्शन और नर्सिंग देखभाल के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा।
मृतक के रिश्तेदारों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरती गई और डॉक्टरों द्वारा दवा देने के बाद मरीज़ की हालत बिगड़ गई। उनका यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया गया और जूनियर डॉक्टरों ने उनके साथ मारपीट की। हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
डॉक्टरों पर मारपीट के आरोप
घटना की गंभीरता को देखते हुए, PMCH के सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रही नर्सों से बात करके स्थिति को शांत करने की कोशिश की। हालांकि, नर्सों ने साफ कर दिया कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती और शामिल डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अस्पताल परिसर के CCTV फुटेज की जांच की भी मांग की है।
फिलहाल, अस्पताल प्रशासन स्थिति को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट के कारण मरीज़ों और उनके परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी नज़रें प्रशासन के अगले कदमों और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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