Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---
Advertisement
Ad
---Advertisement---
Advertisement
Ad

Sunday Lifestyle: जब चाय की प्याली से झांकती थी फुर्सत…

On: June 21, 2026 8:47 PM
Follow Us:
Sunday Lifestyle: When leisure peeked out from a cup of tea...
---Advertisement---
Advertisement
Ad

Sunday Lifestyle: कहते हैं कि भगवान ने छह दिन दुनिया बनाई और सातवें दिन आराम किया। उसी तर्ज पर इंसानों के लिए बना था… संडे! एक ऐसा पावन दिन, जब इंसान गधे की तरह खटने के बाद अपनी टांगें पसार सके। लेकिन आज के इस डिजिटल कलियुग में संडे की ऐसी-तैसी हो चुकी है। आजकल इंसान की सुबह आँख खुलने से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन के ‘अलार्म’ से होती है। आँख बाद में खुलती है, हाथ में मोबाइल पहले आता है। बिस्तर पर लेटे-लेटे, बिना ब्रश किए, ‘गुड मॉर्निंग’ की ताज़ा हवा खाने के बजाय हम कंबल के अंदर ही उंगलियां घिसने लगते हैं और ‘इंस्टाग्राम रील्स’ स्क्रॉल होने लगती हैं। नतीजा? जो संडे कभी ‘लेज़ी संडे’ हुआ करता था, वो अब ‘स्क्रीन संडे’ बनकर दम तोड़ चुका है। हमारा ‘डिजिटल डिटॉक्स’ का इरादा तो बस बेड पर ही ढेर हो जाता है।

Sunday Lifestyle: क्या सोशल मीडिया ने रविवार का सुकून खत्म कर दिया?

ज़रा फ्लैशबैक की गाड़ी में बैठिए और याद कीजिए वो पुराना, संस्कारी रविवार। तब संडे का मतलब कोई ‘नोटिफिकेशन’ या ‘ईमेल’ का भयंकर टेंशन नहीं होता था। तब संडे की सुबह रेडियो पर अमीन सयानी की आवाज़ या फरमाइशी गानों के इंतज़ार से गुलज़ार होती थी। बालकनी में आराम से बैठना, बिना किसी हड़बड़ी के चाय की सुड़कती प्याली के साथ अख़बार का एक-एक पन्ना पलटना एक मुकम्मल इबादत जैसा था। और दोपहर? दोपहर का मतलब होता था… बिना किसी अलार्म के, घोड़े बेचकर ऐसी तगड़ी तानना कि सीधे शाम की चाय पर ही होश आए। न कोई ‘स्टेटस’ अपडेट करने की जल्दी थी, न ‘स्टोरी’ लगाने का कोई प्रेशर। तब फुर्सत सचमुच चाय की प्याली से झांकती थी, आज तो वो स्क्रीन की ‘लो-बैटरी’ के खौफ़ में कहीं दफ़्न हो गई है।

कैसे मोबाइल ने छीन ली हमारी फुर्सत

आजकल के संडे का हाल तो ‘धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का’ वाला हो गया है। हम वीकेंड का लुत्फ़ उठाने के चक्कर में इतने बिजी हो जाते हैं कि मंडे की सुबह तक थकान से बदन टूट रहा होता है। अब तो लोग रिलैक्स होने के लिए भी किसी महंगे ‘कैफ़े’ में जाते हैं। पर वहाँ भी सुकून से कॉफ़ी पीने के बजाय पहले पांच एंगल से फोटो खींचेंगे, ‘पाउट’ बनाएंगे, फिर फिल्टर लगाकर पोस्ट करेंगे, ताकि पूरी दुनिया को चिढ़ा सकें कि ‘लुक, आई एम एंजॉइंग माई संडे!’ अरे भाई, जब तक फोटो पर पचास ‘लाइक्स’ और ‘कमेंट्स’ न आएं, तब तक तो पेट का खाना ही हज़म नहीं होता। इसे फुर्सत नहीं, ‘दिखावे का दौरा’ कहते हैं। सोशल मीडिया के इस मायाजाल ने हमसे हमारी वो बेफ़िक्री छीन ली है, जो कभी संडे की असली जान हुआ करती थी। लोग पागलों की तरह स्क्रीन पर अंगूठा घिसे जा रहे हैं, जैसे स्क्रीन के अंदर से कोई अलादीन का जिन निकलने वाला हो!
तो बॉस, इस रविवार आपके इस भाई यानी आरजे राकेश की एक छोटी सी गुज़ारिश मान लीजिए। आज के दिन अपनी इन मासूम उंगलियों को थोड़ा रहम दीजिए। इस सोशल मीडिया रूपी दलदल से खुद को ‘लॉग-आउट’ करिए और अपनी असली ज़िंदगी में ‘लॉग-इन’ कीजिए। कम से कम एक घंटे के लिए अपने इस चौबीस घंटे के वफ़ादार चमचे यानी स्मार्टफोन को साइलेंट करिए और किसी अलमारी के सबसे अंधेरे कोने में छुपा दीजिए।

Sunday Lifestyle: फुर्सत की तलाश में भटकता आधुनिक इंसान

घर के लोगों के साथ बैठिए, मम्मी-पापा या बीवी-बच्चों के आमने-सामने बैठकर सुख-दुख की दो बातें कीजिए। पुरानी सड़ी-गली यादों को ताज़ा करके ज़रा ठहाके लगाइए, या फिर कुछ नहीं तो बिना किसी वज़ह के बस छत के पंखे को ही गोल-गोल घूमते निहारते रहिए। यकीन मानिए, दुनिया का कोई भी ‘वायरल वीडियो’ उस सुकून की बराबरी नहीं कर सकता जो अपनों के बीच बैठकर खिलखिलाने से मिलता है। तो फिर देर किस बात की? तुरंत फोन रखिए, चाय का दूसरा कप मंगवाइए और इस संडे को सचमुच का ‘फ्री-डे’ बना डालिए!

यह भी पढ़ें: 

RJ Rakesh

RJ Rakesh is a veteran Kolkata-based journalist, celebrated celebrity Radio Jockey, and renowned TV anchor. Serving as the West Bengal Head of Mithila Top, he boasts 32 years of excellence across Radio, TV, Print, and Digital. Covering politics and society, his signature writing style is widely acclaimed for delivering factually precise, lucid, and deeply engaging narratives.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

West Bengal Politics: Is all well within the TMC, or is the crisis deepening? Understand the full political equation.

West Bengal Politics: TMC में सब कुछ ठीक है या बढ़ रहा है संकट? जानिए पूरा राजनीतिक समीकरण

Lalu Yadav Birthday: Lalu Yadav turns 79; here are some of his most talked-about anecdotes.

Lalu Yadav Birthday: 79 साल के हुए लालू यादव, जानिए उनके सबसे चर्चित किस्से

Dileep Kumar Bihar: बिहार का 'युवा शेर': जेल की सलाखें भी जिसे झुका न सकीं!

Dileep Kumar Bihar: बिहार का ‘युवा शेर’: जेल की सलाखें भी जिसे झुका न सकीं!

Qurbani Rules Saudi Arabia: सऊदी अरब में हज के दौरान गाय-ऊंट की कुर्बानी पर रोक, जानिए नया नियम

Qurbani Rules Saudi Arabia: सऊदी अरब में हज के दौरान गाय-ऊंट की कुर्बानी पर रोक, जानिए नया नियम

Ritu Jaiswal BJP Join: राजद से निष्कासन के बाद अब भगवा रंग में रंगेंगी रितु

Ritu Jaiswal BJP Join: राजद से निष्कासन के बाद अब भगवा रंग में रंगेंगी रितु

Digital Politics India: ​रील्स वाली सरकार VS बेरोज़गार युवा, देश में बड़ा आक्रोश!

Digital Politics India: ​रील्स वाली सरकार VS बेरोज़गार युवा, देश में बड़ा आक्रोश!

Motorola Razr Fold भारत में लॉन्च, बैटरी और दमदार कैमरा से मचाएगा धमाल

Motorola Razr Fold भारत में लॉन्च, बैटरी और दमदार कैमरा से मचाएगा धमाल

Bengal Elections 2026: जीत का गुलाल या इंतकाम का नंगा नाच?

Bengal Elections 2026: जीत का गुलाल या इंतकाम का नंगा नाच?

Labor Day 2026: पसीने की स्याही, इंकलाब का नाम: सलाम उन हाथों को जो रचते हैं जहान!

Labor Day 2026: पसीने की स्याही, इंकलाब का नाम: सलाम उन हाथों को जो रचते हैं जहान!

Bengal Election Analysis: रिकॉर्ड की हैट्रिक या फँस जाएगा सत्ता का पेंच?

Bengal Election Analysis: रिकॉर्ड की हैट्रिक या फँस जाएगा सत्ता का पेंच?

धर्मतल्ला का धुआँ और पीली टैक्सी का 'साइलेंट' स्टेयरिंग: क्या मिथिला तय करेगी बंगाल का भाग्य?

धर्मतल्ला का धुआँ और पीली टैक्सी का ‘साइलेंट’ स्टेयरिंग: क्या मिथिला तय करेगी बंगाल का भाग्य?

Leave a Comment