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Baba Nagarjun को अब तक भारत रत्न नहीं मिलने पर MSU ने जताई नाराजगी

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Baba Nagarjun: मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) ने इस बात पर गहरी चिंता और निराशा जताई है कि बाबा नागार्जुन जो एक जन-कवि, दूरदर्शी विचारक और भारतीय साहित्य की एक महान हस्ती हैं अब तक देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित नहीं किया गया है। यूनियन का कहना है कि बाबा नागार्जुन न केवल मिथिला की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं, बल्कि पूरे भारत की सामूहिक चेतना और लोक-साहित्य के भी सशक्त प्रतिनिधि हैं।

Baba Nagarjun: बाबा नागार्जुन को भारत रत्न देने की मांग तेज

मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण राय ने कहा कि बाबा नागार्जुन ने अपने लेखन के माध्यम से शोषितों, हाशिए पर पड़े लोगों, किसानों, मजदूरों और आम जनता की आवाज़ को प्रभावी ढंग से बुलंद किया। उनकी रचनाएँ सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभावना की सशक्त अभिव्यक्ति मानी जाती हैं। इसके बावजूद, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें आज तक भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वंचित रखा गया है।

उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन का साहित्य किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला जैसी कई भाषाओं में बेहतरीन साहित्यिक रचनाएँ करके उन्होंने भारतीय साहित्य को एक नई दिशा दी। उनके साहित्यिक प्रयासों ने सामाजिक जागरूकता, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और जन-हितैषी विचारधारा को मज़बूत किया।

विद्या भूषण राय के अनुसार, बाबा नागार्जुन को भारत रत्न से सम्मानित करना न केवल एक साहित्यकार के लिए सम्मान होगा, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक चेतना, लोक संस्कृति और जन-केंद्रित साहित्यिक परंपरा के लिए भी एक श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को उनके बहुआयामी साहित्यिक और सामाजिक योगदान को उचित मान्यता देते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।

मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने केंद्र से की अपील

मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह बाबा नागार्जुन को उनके ऐतिहासिक साहित्यिक योगदान और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए, बिना किसी देरी के ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा करे। यूनियन का मानना ​​है कि इस तरह के फैसले से न केवल मिथिला क्षेत्र के लोगों की भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि देश भर के लेखकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों की भावनाओं का भी सम्मान होगा।

यह उल्लेखनीय है कि बाबा नागार्जुन को भारतीय साहित्य के सबसे प्रभावशाली ‘जन-कवियों’ में गिना जाता है। उनकी रचनाएँ आज भी अपनी सामाजिक प्रासंगिकता, आम लोगों के संघर्षों के चित्रण और मानवीय संवेदनाओं के कारण व्यापक रूप से पढ़ी और सराही जाती हैं।

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Bhumika

Bhumika Kumari is a Jharkhand-based journalist from Dhanbad, specializing in politics, entertainment, education, society, and current affairs. Known for her clear, accurate, and accessible writing style, she effectively bridges complex issues for the public. She also serves as a key content writer for the digital platform Mithila Top.

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