Jharkhand Wetland: झारखंड सरकार ने प्राकृतिक जल स्रोतों जिसमें से खासकर वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य वेटलैंड अथॉरिटी की पहली बैठक में वेटलैंड्स की पहचान, सत्यापन, सीमांकन, अधिसूचना और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। अब सरकार राज्य में संभावित वेटलैंड्स का विस्तृत अध्ययन करेगी और उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करेगी।
Jharkhand Wetland: झारखंड में जल क्षेत्रों के संरक्षण की बड़ी पहल
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य की सभी आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की एक व्यवस्थित सूची तैयार करने और समय-समय पर उसे अपडेट करने का निर्देश दिया। इन आर्द्रभूमियों का डिजिटल डेटाबेस बनाने और उसे सुरक्षित रूप से बनाए रखने पर भी ज़ोर दिया गया। सरकार का मकसद सिर्फ़ इन जल-निकायों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ व्यवस्था स्थापित करना भी है।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि ISRO से मिले एटलस के आधार पर झारखंड में 2,119 संभावित वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की सूची तैयार की गई है। अब ज़िला स्तर पर इन सभी संभावित जगहों की भौतिक और तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच के बाद, राज्य स्तर पर इनकी पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
2119 वेटलैंड होंगे चिन्हित
वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) ऐसी प्राकृतिक या मानव-निर्मित जगहें हैं जहाँ पानी या तो हमेशा रहता है या कुछ मौसमों में जमा रहता है। इनके उदाहरणों में तालाब, झीलें, दलदली इलाके, पानी से भरे क्षेत्र और नदियों के किनारे के कुछ हिस्से शामिल हैं। ये जल-क्षेत्र भूजल को फिर से भरने, बाढ़ को कम करने, पानी बचाने और जैव-विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की कई प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास भी प्रदान करते हैं।
संभावित वेटलैंड्स की जांच के दौरान, मौजूदा जल स्रोतों, उनकी वर्तमान स्थिति और आसपास इंसानी गतिविधियों के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाएगी। इसके अलावा, वेटलैंड से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने, अतिक्रमण रोकने और नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा। ज़िला-स्तरीय कमेटियां अपनी रिपोर्ट स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को सौंपेंगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि चिन्हित वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की सीमा-निर्धारण का काम सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाए और उसके बाद नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाए। सरकार इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने की योजना बना रही है, जिसमें वेटलैंड की पहचान और सत्यापन से लेकर सीमा-निर्धारण, नोटिफिकेशन और मैनेजमेंट प्लान तैयार करना शामिल है।
बनेगा डिजिटल डेटाबेस और मैनेजमेंट प्लान
सरकार महत्वपूर्ण वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड भी तैयार करेगी। इसमें पानी के स्रोतों, आसपास होने वाली मानवीय गतिविधियों और समय के साथ हुए बदलावों की जानकारी शामिल होगी। इस डेटा के आधार पर, हर वेटलैंड की खास ज़रूरतों के हिसाब से मैनेजमेंट प्लान बनाए जाएंगे। बैठक में वेटलैंड्स को सिर्फ़ जल-निकायों के तौर पर नहीं, बल्कि पर्यावरण के संतुलन और जैव-विविधता के लिए एक अहम आधार के रूप में देखा गया। प्राकृतिक जल-निकायों के संरक्षण और बहाली से जल संकट से निपटने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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इसके अलावा, वेटलैंड अथॉरिटी के कामकाज को और बेहतर बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जैसे कि टेंडर और खरीद के प्रस्तावों की जांच-पड़ताल, एक टेक्निकल कमिटी का गठन, और लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक खास सिस्टम बनाना।
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ऑफिस के कामकाज के लिए ज़रूरी बजट और मैनपावर की व्यवस्था करने पर भी विचार किया गया। सरकार का मकसद यह पक्का करना है कि वेटलैंड संरक्षण से जुड़े नियम सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित न रहें, बल्कि ज़मीन पर उनकी असरदार ढंग से निगरानी और अमल हो।
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