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चीनी के दाम क्यों बढ़े? जमाखोरी से लेकर गन्ने की फसल तक समझें पूरी वजह

चीनी के दाम क्यों बढ़े?
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नई दिल्ली: देश में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी ने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बाजार में पर्याप्त चीनी होने के बावजूद जमाखोरी और भविष्य में आपूर्ति घटने की आशंका के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा। कारोबारियों ने आगे संभावित कमी की आशंका में जरूरत से पहले चीनी की खरीद बढ़ा दी, जिससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक कम दिखाई देने लगा। सरकार की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति और जमाखोरी पर कार्रवाई की सख्ती के बाद अब चीनी की कीमतों में नरमी के संकेत मिलने लगे हैं।

चीनी के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, देश में घरेलू जरूरत के मुकाबले पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। सालाना करीब 280 लाख टन की घरेलू खपत के मुकाबले लगभग 306 लाख टन चीनी उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में तेजी आई। इसकी एक प्रमुख वजह कारोबारियों की ओर से पहले से अधिक खरीद करना माना जा रहा है। गन्ने की फसल पर मौसम, बीमारी और बारिश के असर को देखते हुए भविष्य में चीनी की उपलब्धता कम होने की आशंका बनी। इसी वजह से कुछ कारोबारियों ने डेढ़ से दो महीने की जरूरत का स्टॉक पहले ही खरीदकर रख लिया।

गन्ने की फसल और रिकवरी रेट ने बढ़ाई चिंता

चीनी उत्पादन को लेकर शुरुआती अनुमान काफी मजबूत था। कृषि मंत्रालय ने मई के अंतिम सप्ताह में करीब 5000.63 लाख टन गन्ने के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया था। पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 4546.11 लाख टन था। हालांकि बाद में चीनी उत्पादन का अनुमान शुरुआती 343 लाख टन से घटकर लगभग 306 लाख टन रह गया। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में उत्पादन करीब 11 प्रतिशत कम रहने का अनुमान सामने आया। इस गिरावट के पीछे गन्ने की गुणवत्ता और रिकवरी रेट में कमी को महत्वपूर्ण कारण माना गया। दो वर्ष पहले राष्ट्रीय औसत रिकवरी करीब 10.10 प्रतिशत थी, जबकि इस बार यह लगभग 9.56 प्रतिशत रही।

बीमारी और बारिश का भी पड़ा असर

गन्ने की फसल पर रेड रॉट, टॉप बोरर और अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव जैसी समस्याओं का असर पड़ा। इन परिस्थितियों ने कई क्षेत्रों में गन्ने की गुणवत्ता को प्रभावित किया। जानकारों के मुताबिक, केवल गन्ने के कुल उत्पादन के आधार पर चीनी उत्पादन का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है। गन्ने की गुणवत्ता और उससे चीनी की रिकवरी भी उत्पादन की वास्तविक तस्वीर तय करती है। इसी वजह से शुरुआती रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के बावजूद बाद के आंकड़ों में चीनी उत्पादन कम रहने की संभावना सामने आई।

सरकार के लिए भी सामने आई निगरानी की चुनौती

चीनी की कीमतों में तेजी के घटनाक्रम ने सरकारी तंत्र के लिए भी लगातार निगरानी की जरूरत को सामने रखा है। गन्ने की फसल, बीमारी, बारिश, जलभराव, गुणवत्ता और राज्यवार रिकवरी रेट की नियमित समीक्षा उत्पादन का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद कर सकती है। अगर उत्पादन में संभावित कमी का संकेत पहले मिल जाए तो स्टॉक प्रबंधन और बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति जैसे कदम समय रहते उठाए जा सकते हैं। इससे अचानक कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आगे कैसे कम हो सकता है चीनी की कीमतों पर दबाव?

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, पेराई सत्र को 10 से 15 दिन पहले शुरू करने से अक्टूबर में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ सकती है। इस अवधि में मांग करीब 24-25 लाख टन रहने का अनुमान बताया गया है। मौजूदा स्टॉक और आयात के साथ अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में दबाव कम कर सकती है। सितंबर के अंत तक करीब 35 लाख टन शुरुआती स्टॉक बचने की उम्मीद जताई गई है। ऐसे में सरकार की ओर से उठाए गए कदम और चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता आने वाले समय में कीमतों को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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Anjali Singh

Anjali Singh is a distinguished Dhanbad-based journalist and the Sampadak (Editor) of Mithila Top. Covering politics, society, education, and entertainment, she is celebrated for her signature writing style... masterfully translating complex current affairs into lucid, precise, and engaging narratives. Committed to factual accuracy, Anjali remains a trusted, influential, and resonant voice in regional journalism.

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