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Anita Murder Case: सांसद ढुल्लू महतो और विधायक जयराम महतो समेत 12 पर FIR, जानिए पूरा मामला

Anita Murder Case: सांसद ढुल्लू महतो और विधायक जयराम महतो समेत 12 पर FIR, जानिए पूरा मामला
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Anita Murder Case: झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो में अनिता हत्याकांड को लेकर चल रहा आंदोलन अब कानूनी और राजनीतिक रूप ले चुका है. आंदोलन और सड़क जाम मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए बीजेपी सांसद ढुल्लू महतो, विधायक जयराम महतो समेत 12 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है. इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है.

जानकारी के मुताबिक, बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मुकेश कुमार मछुआ के आवेदन पर बेरमो थाने में मामला दर्ज किया गया है. प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अनिता की मौत के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान चौक के पास सड़क जाम कर यातायात बाधित किया गया. इसके अलावा सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की आशंका को भी एफआईआर का आधार बनाया गया है.

Anita Murder Case: बेरमो सड़क जाम आंदोलन पड़ा भारी

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें अवैध जमावड़ा, सरकारी काम में बाधा, प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना, धमकी और शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि आंदोलन से आम लोगों को परेशानी हुई और इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका थी.

एफआईआर में बीजेपी सांसद ढुल्लू महतो और विधायक जयराम महतो के अलावा विनोद विश्वकर्मा, अमन कुमार रवि, कुणाल महतो, विनोद चौहान, राजकुमार गिरी, अर्चना सिंह, जीतेंद्र कुमार सिंह, आनंद कुमार, सूरजकांत पांडे उर्फ ​​सूरज पांडे और टिंकू शर्मा को आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

गौरतलब है कि अनिता की मौत के बाद इलाके में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मृतक के परिवार के लिए न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया था. इस दौरान सड़क जाम और प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई थीं. इस आंदोलन में कई राजनीतिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जिसके बाद प्रशासन ने पूरी घटना की समीक्षा की।

ढुल्लू महतो और जयराम महतो बने आरोपी

एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है. समर्थकों का कहना है कि न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया गया, जबकि प्रशासन का रुख है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. ऐसे में यह मामला अब सिर्फ एक आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है. अनिता की मौत पर शुरू हुआ आंदोलन अब न्याय, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में पहुंच गया है. अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं.

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