BRICS Summit 2026: भारत की मेज़बानी में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रहे इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देश वैश्विक चुनौतियों, साझा प्राथमिकताओं और आपसी सहयोग को मज़बूत करने पर चर्चा कर रहे हैं।
BRICS Summit 2026: क्या हैं PM मोदी का बड़ा ऐलान?
वही इस बार ब्रिक्स समूह में 11 देश शामिल हैं, जिनमें ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, भारत, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। 2026 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है, जिसका विषय है: “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।” भारत ने 1 जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। गौरतलब है कि 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।
BRICS Summit 2026 gets underway in Delhi. pic.twitter.com/WN7YWi5bTg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
सम्मेलन के पहले दिन भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली। ब्रिक्स देशों ने आम सहमति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाया। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर ईरान और यूएई के बीच मतभेदों के बावजूद, पर्दे के पीछे हुई बातचीत के बाद इस घोषणापत्र पर सहमति बनी। घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई और पहलगाम हमले का भी ज़िक्र किया गया।
अपने समापन भाषण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के ज़रिए नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या-क्या?
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ की भूमिका को बढ़ाने के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि उन्हें अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक सुधार के रोडमैप का रूप दिया जा सके। उन्होंने UN सुरक्षा परिषद में सुधार, वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर में बदलाव और वैश्विक आर्थिक गवर्नेंस में उचित प्रतिनिधित्व की मांग की।
इसके अलावा, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक इमरजेंसी सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। पीएम मोदी ने AI, साइबरस्पेस, स्पेस और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ‘ग्लोबल साउथ’ को सिर्फ़ नियम मानने वाले से नियम बनाने वाले के तौर पर बदलने पर ज़ोर दिया।
ब्रिक्स की भविष्य की दिशा के बारे में प्रधानमंत्री ने निरंतरता बनाए रखने और कार्यान्वयन के लिए तंत्र स्थापित करने की बात भी कही। ‘ट्रोइका’ व्यवस्था के माध्यम से फैसलों और पहलों को आगे बढ़ाने और एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने के प्रस्ताव रखे गए। दिल्ली में ब्रिक्स फोरम में मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और अन्य वैश्विक नेताओं की मौजूदगी ने इस शिखर सम्मेलन को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।
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