Darbhanga News: कासिम एजुकेशनल फाउंडेशन द्वारा दरभंगा सदर ब्लॉक के मुरिया पंचायत के मुरिया गांव में आरिफ उर्दू क्लासेस के परिसर में “उर्दू भाषा की वर्तमान स्थिति और रोजगार के अवसर” विषय पर एक दिवसीय शैक्षिक संगोष्ठी और “छात्र अभिनंदन समारोह 2026” का आयोजन किया गया।
उर्दू भाषा और रोजगार पर संगोष्ठी
कार्यक्रम में शिक्षा जगत के नामचीन साहित्यकारो की उपस्थिति रही। संगोष्ठी की अध्यक्षता उर्दू विभाग मिथिला यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो शाकिर खलीक ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री डॉ शकील अहमद, कॉलेज ऑफ कॉमर्स उर्दू विभाग के प्रो सफ़दर इमाम क़ादरी, नीतीश्वर कॉलेज मुजफ्फरपुर के डॉ कामरान ग़नी सबा ने छात्र छात्राओं को शिक्षा क्षेत्र में बढ़ने के टिप्स दिए। फाउंडेशन के सचिव आरिफ इक़बाल ने अतिथियों का स्वागत शॉल और गुलदस्ता से किया, मंच संचालन एहतेशाम उल हक ने किया।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों की बड़ी बातें
इस अवसर पर मैट्रिक और इंटर उत्तीर्ण करने वाले 30 उर्दू भाषी छात्रों को स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र और पदक देकर प्रोत्साहित किया गया। मैट्रिक और इंटर में पढ़ रहे छात्रों को भी पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने कहा कि समाज के उन्नति का एक ही मन्त्र है अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ें, उन्हें शिक्षित करें, शिक्षा और कड़ी मेहनत का कोई दूसरा शॉर्टकट नहीं। उन्होंने कहा कि आरिफ इकबाल बच्चों के विकास के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं जो सराहनीय है, डॉ शकील ने उर्दू भाषा के विकास और संवर्धन के इतिहास के बारे में भी बताया और कहा कि यह हमारी मातृभाषा भी है और उर्दू और हिंदी दोनों का विकास अमीर खुसरो और अन्य कवियों ने साथ-साथ किया है। उन्होंने घर में उर्दू का वातावरण बनाने की अपील की। दरभंगा के शिक्षक आरिफ इक़बाल की ईमानदारी का ही फल है कि बड़ी संख्या में बच्चे बिहार बोर्ड के परीक्षा में सफल हुए हैं।
मेधावी छात्रों का मिला सम्मान
जाने-माने आलोचक प्रोफेसर सफदर इमाम कादरी ने कहा कि हम मुसलमान लड़कियों के लिए गहने तो बनाते हैं, लेकिन उनकी शिक्षा में निवेश नहीं करते, जो चिंताजनक है, उन्होंने कहा कि लड़कियों को शिक्षा के सभी अवसर मिलने चाहिए। दरभंगा में उर्दू भाषा मे रोजगार के अवसर पर प्रो क़ादरी ने कहा कि उर्दू का अध्ययन करके भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि आप उर्दू का अध्ययन उसी तरह करें जैसे आप अन्य विषयों का करते हैं। प्रोफेसर कादरी ने यह भी कहा कि उर्दू को करियर के रूप में अपनाने के कई अवसर हैं, लेकिन इसकी आवश्यकताएं अन्य विषयों के समान ही हैं। उन्होंने छात्रों के प्रति आरिफ इकबाल के समर्पण और प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे शिक्षक समाज के लिए वरदान हैं।
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अपने अध्यक्षीय भाषण में दरभंगा के प्रोफेसर शाकिर खालिक ने कहा कि हमें अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देनी चाहिए और इसके लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। नितेश्वर कॉलेज मुजफ्फरपुर के सहायक प्रोफेसर डॉ. कामरान गनी, जो विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे, ने कहा कि अभिभावक लड़कियों को स्कूल जाने से रोकते हैं। यह निराशाजनक है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के अवसर देने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन केएस कॉलेज के उर्दू विभाग के प्रमुख डॉ. अब्दुल वदूद कासमी और एहतेशाम उल हक ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में शिक्षक ओसामा अकील, ऋषिकेश कुमार और एहतेशाम उल हक को अतिथियों द्वारा सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन आरिफ इक़बाल के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।













