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JSSC Paper Leak Case: झारखंड CGL पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, जांच में कई अहम दावे

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) प्रतियोगी परीक्षा-2023 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में एक बार फिर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। रांची की AJC-1 अदालत ने आरोपी संजय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

JSSC Paper Leak Case: झारखंड CGL पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, जांच में कई अहम दावे
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JSSC Paper Leak Case: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) प्रतियोगी परीक्षा-2023 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में एक बार फिर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। रांची की AJC-1 अदालत ने आरोपी संजय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है। 15 अक्टूबर 2026 को पारित एक आदेश में अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार किया।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को पटना के एक घर में ले जाया गया, जहाँ उन्हें लगभग तीन घंटे तक प्रश्न-पत्र और उनके उत्तर याद कराए गए। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए कथित तौर पर उन प्रश्न-पत्रों और उत्तरों को जला दिया गया। हालाँकि, ये अभी केवल आरोप हैं और इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

JSSC Paper Leak Case: पटना में अभ्यर्थियों को जुटाने का आरोप

अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश किए गए विवरण के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को कई उम्मीदवारों को पटना बुलाया गया था। गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के आसपास इकट्ठा करने के बाद, उन्हें कथित तौर पर एक घर में ले जाया गया। आरोप है कि वहां उन्हें प्रश्न पत्रों के तीन सेट और उनके उत्तर उपलब्ध कराए गए थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, उम्मीदवारों को लगभग तीन घंटे तक सवाल और जवाब याद कराए गए। इसके बाद प्रश्न पत्रों और जवाबों वाली सामग्री को जला दिया गया और उम्मीदवारों को अलग-अलग रास्तों से भेज दिया गया।

अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और चेक जमा कराने का आरोप

CID की जांच के आधार पर अभियोजन पक्ष का दावा है कि उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और चेक जमा कराए गए थे। आरोप है कि (JSSC Paper Leak Case ) चयन का वादा करके इन दस्तावेजों को सुरक्षा के तौर पर अपने पास रखा गया था।

जांच में संजय कुमार की भूमिका एक कथित बिचौलिए के रूप में सामने आई है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने अपने परिचितों और अन्य लोगों के ज़रिए परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को इकट्ठा किया और पटना में कथित इंतज़ाम कराने के लिए अन्य सह-आरोपियों से संपर्क किया।

बैंक खाते में तीन लाख रुपये आने का दावा

अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए विवरण के अनुसार, दिसंबर 2024 में अमित कुमार ने संजय कुमार के बैंक खाते में लगभग तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि संजय कुमार इन पैसों को राकेश रंजन तक पहुँचाने के लिए पटना गए थे और उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर वित्तीय लेन-देन में समन्वय किया था।

जांच में बोकारो के दुग्धा, पश्चिम बंगाल के नियामतपुर, सितुलपुर पटना और नेपाल के बीरगंज जैसी जगहों का भी जिक्र है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच से आरोपियों के बीच संपर्क के बारे में जानकारी सामने आई है।

बचाव पक्ष ने आरोपों पर उठाए सवाल

संजय कुमार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि उनका नाम FIR में नहीं है और उन्हें केवल शक के आधार पर इस मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भले ही संपर्क या लोकेशन का पता चल जाए, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि व्यक्ति किसी साजिश में शामिल था।

बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि संजय कुमार परीक्षा में शामिल तो हुए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने हिरासत के दौरान उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और बाद में उन्हें कथित कबूलनामे के तौर पर पेश कर दिया।

अदालत ने क्यों खारिज की जमानत याचिका?

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि केस डायरी के अनुसार, संजय कुमार की कथित भूमिका केवल उम्मीदवारों का परिचय कराने तक ही सीमित नहीं थी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि वह उम्मीदवारों को इकट्ठा करने परीक्षा से पहले की गतिविधियों में समन्वय करने और वित्तीय लेन-देन में मदद करने में शामिल था।

उपलब्ध दस्तावेजों और केस डायरी पर विचार करने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस चरण में संजय कुमार को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। नतीजतन, 15 अक्टूबर 2026 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। यह मामला सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और उनमें कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ा है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला उचित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

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Hemant Kumar

Hemant Kumar is a dynamic Darbhanga-based journalist and the visionary founder of Mithila Top. With five years of impactful reporting across politics, society, education, and entertainment, he is celebrated for his signature writing style... masterfully delivering factually precise, lucid, and engaging narratives that make him a trusted voice in regional journalism.

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