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महारानी कामासुंदरी देवी का निधन, राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल

महारानी कामासुंदरी देवी का निधन, राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल
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Darbhanga Raj: दरभंगा राजघराने की आखिरी महारानी कामासुंदरी देवी का 94 साल की उम्र में निधन हो गया, जो मिथिलांचल क्षेत्र और राजघराने के लिए एक बड़ा नुकसान है। उनके निधन के बावजूद, उन्हें उम्मीद के मुताबिक राजकीय सम्मान नहीं मिला, जबकि वह संविधान सभा की सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद थीं। उन्होंने अपने आवास ‘कल्याणी निवास’ में अंतिम सांस ली, जिससे राजघराने की गौरवशाली विरासत का अंत हो गया। परिवार के वंशजों ने दुख जताया कि इतनी महान परोपकारी महारानी के नाम पर कोई सम्मान नहीं दिया गया। कामासुंदरी देवी की मृत्यु के साथ, दरभंगा राजघराने की आखिरी कड़ी इतिहास में दर्ज हो गई है, जो अब सिर्फ यादों का हिस्सा बनकर रह गई है।

चचेरे भाई के पोते कुमार रत्नेश्वर सिंह ने दी मुखाग्नि

दरभंगा राजघराने की आखिरी महारानी कामासुंदरी देवी (महाराजा कामेश्वर सिंह की पत्नी) अंतिम संस्कार मढ़ेश्वर परिसर में किया गया। चिता को उनके चचेरे भाई के पोते कुमार रत्नेश्वर सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे, जिनमें दरभंगा के जिला मजिस्ट्रेट कौशल कुमार, एसडीओ विकास कुमार और सदर डीएसपी राजीव कुमार शामिल थे।

राजकीय सम्मान न मिलने से लोगों में नाराजगी

उनके अंतिम संस्कार में पर्याप्त राजकीय सम्मान न मिलने से मौजूद लोगों में काफी नाराजगी थी। लोग चुपचाप प्रशासन से इस बारे में सवाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दरभंगा राजघराने ने आजादी से पहले और बाद में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था, इसके बावजूद उनके ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज किया गया। महाराजा कामेश्वर सिंह संविधान सभा के सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद थे, और कामासुंदरी देवी उनकी तीसरी पत्नी थीं, जिन्होंने दरभंगा राजघराने को बहुत प्रसिद्धि दिलाई थी।

प्रोफेसर अजय नाथ झा ने कहा कि उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है। महारानी कामासुंदरी देवी की मृत्यु के साथ, दरभंगा राजघराने की आखिरी कड़ी इतिहास में दर्ज हो गई है, जो अब सिर्फ यादों का हिस्सा बनकर रह गई है। उन्होंने आजादी से पहले और बाद में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। दरभंगा में एक ही कैंपस में दो विश्वविद्यालय होने का श्रेय भी उन्हीं के प्रयासों को जाता है।

जिला मजिस्ट्रेट पुष्पांजलि अर्पित की

जिला मजिस्ट्रेट कौशल कुमार ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह दरभंगा के लिए एक बड़ी क्षति है। दरभंगा राज की आखिरी महारानी और स्वर्गीय महाराजा कामेश्वर सिंह की पत्नी महारानी कामासुंदरी देवी का सोमवार सुबह 3:00 बजे निधन हो गया। महारानी साहिबा का जन्म 22 अक्टूबर 1932 को मंगरौनी में हुआ था, और 94 साल की उम्र में उनके अचानक निधन की खबर से हम सभी बहुत दुखी हैं।

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ऐसा लगता है जैसे मिथिला की एक शांत लेकिन शक्तिशाली चेतना आज हमारे बीच से चली गई है। उनके जाने से न सिर्फ दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र और देश के सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक जीवन में एक ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भरा नहीं जा सकता।

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