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Bengal Election Analysis: रिकॉर्ड की हैट्रिक या फँस जाएगा सत्ता का पेंच?

Bengal Election Analysis: रिकॉर्ड की हैट्रिक या फँस जाएगा सत्ता का पेंच?
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Bengal Election Analysis: बंगाल का चुनाव कभी महज़ ‘वोट’ की गिनती नहीं रहा, ये हमेशा से ‘अस्मिता’ और ‘वजूद’ की लड़ाई रहा है। आज दूसरे चरण की वोटिंग मुकम्मल होने के साथ ही गलियों में एक ही सवाल तैर रहा है कि क्या ममता बनर्जी रिकॉर्ड्स की तमाम दीवारें तोड़कर नया इतिहास लिखेंगी, या फिर बंगाल का ऊँट किसी ऐसी करवट बैठेगा जहाँ सत्ता का गणित पूरी तरह उलझ जाएगा?

क्या वाकई ‘खेला’ पलट गया है या ये सिर्फ एक ट्रेलर है?

अगर हम दिल्ली के ‘एसी’ कमरों से निकलकर बंगाल के चाय के ठेलों पर बैठी भीड़ की आंखों में झांकें, तो वहां एक अजीब सी खामोशी दिखती है। ये वो खामोशी नहीं है जो डर से पैदा होती है, ये वो ‘स्ट्रेटेजिक साइलेंस’ है जो बड़े-बड़ों का सिंहासन हिला देती है। एग्जिट पोल्स भले ही ‘नेक-टू-नेक’ मुकाबले का दावा करें, लेकिन बंगाल इस बार अपनी तकदीर का फैसला किसी लहर में बहकर नहीं, बल्कि बहुत ठोक-बजाकर कर रहा है। कहते हैं ना कि ‘दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है’… यही हाल इस बार बंगाल के वोटर का है। अगर टीएमसी रिकॉर्ड बनाती है, तो ये भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा ‘कमबैक’ होगा। लेकिन अगर आंकड़े बहुमत के जादुई निशान से पहले ही ठिठक गए, तो याद रखिएगा कि सूबे की सियासत में ऐसी ‘खिचड़ी’ पकेगी जिसकी आंच बहुत दूर तक जाएगी। तब ‘आसमान से टपके और खजूर पर अटके’ वाली स्थिति बन सकती है।

Bengal Election Analysis: ग्राउंड ज़ीरो का मिज़ाज: अब किसकी होगी मात?

इस बार का चुनाव ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ की जंग बन चुका है। संदेशखाली से लेकर चाय बागानों की टीस तक, और भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर ‘लक्ष्मी भंडार’ की गूँज तक… मुद्दों की एक लंबी फेहरिस्त है। एक तरफ सत्ताधारी दल ‘अंतिम सांस’ तक लड़ने को तैयार है, तो दूसरी तरफ विपक्ष की ‘अग्रेसिव फील्डिंग’ ने दिग्गजों के माथे पर पसीना ला दिया है। मतदाता के व्यवहार में एक ‘सार्कास्टिक’ यानी तंजिया रवैया है। वो मुस्कुराकर सबका स्वागत तो कर रहा है, पर उसके मन की परतों को पढ़ना फिलहाल नामुमकिन है। सच तो ये है कि ‘हाथ कंगन को आरसी क्या’, नतीजे खुद ही गवाही देंगे कि ये चुप्पी ‘एंटी-इन्कम्बेंसी’ की आहट है या नेता के प्रति वफ़ादारी का इम्तिहान।

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बंगाल का ‘जनादेश’ जो रूह हिला देगा और सत्ता की नींद उड़ा देगा!

बंगाल की रूह उसकी सादगी में है, लेकिन उसकी सियासत उसकी ‘ज़िद’ में। अगर नतीजे किसी एक तरफ साफ नहीं झुके, तो ‘पोस्ट-पोल अलायंस’ की ऐसी बिसात बिछेगी जहाँ उसूलों से ज़्यादा समझौते भारी पड़ेंगे। ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का डर रहेगा और ‘एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा’ वाली राजनीति देखने को मिल सकती है।

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Bengal Election Analysis: 4 मई को क्या होने वाला है?

नतीजा जो भी हो, बंगाल को कोई ‘ग्रांटेड’ नहीं ले सकता। जब पेटियां खुलेंगी, तो वो सिर्फ एक पार्टी की जीत नहीं होगी, बल्कि उस आम इंसान की जीत होगी जो उम्मीद की एक पतली सी डोरी थामे पोलिंग बूथ तक गया है।

RJ Rakesh

RJ Rakesh is a veteran Kolkata-based journalist, celebrated celebrity Radio Jockey, and renowned TV anchor. Serving as the West Bengal Head of Mithila Top, he boasts 32 years of excellence across Radio, TV, Print, and Digital. Covering politics and society, his signature writing style is widely acclaimed for delivering factually precise, lucid, and deeply engaging narratives.

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