Bihar News: पूर्वी भारत में स्वास्थ्य नवाचार को नई दिशा देते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना को मेडटेक इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना के लिए वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है। यह संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है, जो चिकित्सा नवाचार, अनुसंधान और हेल्थ स्टार्टअप्स को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम है। यह अनुदान ब्लॉकचेन फॉर इम्पैक्ट द्वारा 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम में डीएसटी-टीटीआई, भारत सरकार के प्रतिनिधि, आईआईटी दिल्ली के सदस्य तथा कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे. समारोह के दौरान औपचारिक रूप से लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) सौंपा गया, जो इस परियोजना की आधिकारिक स्वीकृति और सहयोग का प्रतीक है। एलओआई प्राप्त करने वाले प्रतिनिधियों में डॉ. संजय पांडेय, डीन (रिसर्च), एम्स पटना, डॉ. सुदीप कुमार, प्रोफेसर, अस्थि रोग विभाग तथा डॉ. मौसमी साहा, सीईओ, एम्स पटना इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल शामिल रहे।
हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को बढ़ावा
सभी विशेषज्ञों ने संस्थान की अनुसंधान और नवाचार क्षमता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक के रूप में डॉ. सुदीप कुमार कार्य करेंगे. वहीं मेडटेक इनक्यूबेशन सेंटर का नेतृत्व डॉ. मौसमी साहा करेंगी। वे केंद्र की रणनीति, संचालन व्यवस्था तथा नवाचार तंत्र के समग्र विकास की जिम्मेदारी संभालेंगी और स्टार्टअप्स तथा शोध परियोजनाओं को मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। स्थापित होने वाला यह नया केंद्र चिकित्सा उपकरणों के विकास, क्लिनिकल अनुसंधान तथा हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा विकसित विचारों को तकनीकी समाधान में बदलकर उन्हें मरीजों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है। जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार हो सके।
युवाओं को बेहतर अवसर
एम्स पटना पहले से ही चिकित्सा नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस नए केंद्र के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, आधुनिक अधोसंरचना, नियामक मार्गदर्शन तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग का बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य तकनीक विकास को मजबूती मिलेगी।
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कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय पांडेय ने “स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों में ट्रांसलेशनल इनोवेशन को शामिल करने” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी भाग लिया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे भविष्य के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को व्यावहारिक समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि देश में नवाचार के क्षेत्र में एम्स पटना की लगातार बढ़ती पहचान को दर्शाती है. साथ ही यह किफायती, सुलभ और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की संस्थान की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
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