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Bhutan में Study in India Program में दिखी भारत की शिक्षा शक्ति

Bhutan में Study in India Program में दिखी भारत की शिक्षा शक्ति
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Study in India Program: भारत की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक शिक्षा का संगम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देखने को मिला। नालंदा यूनिवर्सिटी ने भूटान के थिम्पू में हुए “स्टडी इन इंडिया” प्रोग्राम में हिस्सा लिया। यूनिवर्सिटी के रिप्रेजेंटेटिव्स ने होने वाले स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स से मुलाकात की। इससे यूनिवर्सिटी को भूटान के साथ अपने पुराने ऐतिहासिक रिश्तों को याद करने का मौका मिला, खासकर गुरु पद्मसंभव जैसे महान बौद्ध गुरुओं से जुड़े रिश्तों को।

Study in India Program: नालंदा यूनिवर्सिटी भूटान में चमकी

नालंदा यूनिवर्सिटी ने यह भी दिखाया कि वह एशिया की महान ज्ञान परंपराओं को मॉडर्न एजुकेशन के साथ जोड़कर कैसे आगे बढ़ रही है। अपने दौरे के दौरान, नालंदा यूनिवर्सिटी के डेलीगेशन (डॉ. किशोर धवाला और डॉ. प्रांशु समदर्शी) ने एम्बेसडर संदीप आर्य से मुलाकात की। भारत और भूटान के बीच पुराने कल्चरल और स्कॉलरली रिश्तों को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। टीम ने रॉयल सिविल सर्विस कमीशन की चेयरपर्सन सुश्री ताशी पेम से भी मुलाकात की और उन्हें एजुकेशन के फील्ड में बढ़ते कोऑपरेशन के बारे में बताया।

नालंदा यूनिवर्सिटी ने 11वें भूटान इंटरनेशनल एजुकेशन फेयर 2026 में भी हिस्सा लिया। यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर कई स्टूडेंट्स आए, जिन्हें एजुकेशनल मौकों और नालंदा यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप स्कीम के बारे में बताया गया। पुरानी विरासत और आज के कोर्स के अनोखे मेल ने नालंदा पवेलियन को स्टूडेंट्स के बीच एक पॉपुलर इवेंट बना दिया। एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर, सुश्री येजांग डे थापा ने यूनिवर्सिटी के स्टॉल का दौरा किया।

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उन्होंने नालंदा टीम से बात की और यूनिवर्सिटी के अनोखे तरीके की तारीफ़ की, जो पुरानी विरासत को मॉडर्न एजुकेशन के साथ जोड़ता है। इन कोशिशों से, नालंदा यूनिवर्सिटी भारत और भूटान के बीच एक मज़बूत लिंक का काम करती है। इससे न सिर्फ़ दोनों देशों में एजुकेशन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि हमारी मिली-जुली संस्कृति और ज्ञान की परंपरा भी मज़बूत होती है।

नालंदा संवाददाता संजीव कुमार बिट्टू की रिपोर्ट…

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