Sidho Kanho Jayanti: हूल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर झारखंड के राजधानी रांची में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस खास मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचे, जहां उन्होंने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
हूल दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि रही है। यह प्रदेश भारत का एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनेक वीर सपूतों ने जन्म लेकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी और मूलवासी समुदाय ने अपने हक और अधिकारों के लिए उस दौर में लड़ाई लड़ी, जब देश के अन्य हिस्सों में आजादी की सोच भी पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी।
हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू अमर रहें! pic.twitter.com/4rf3cGxkrU
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) April 11, 2026
Sidho Kanho Jayanti: सिदो-कान्हू के संघर्ष को किया याद
वीर शहीद सिदो और कान्हू के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अन्याय, शोषण और ज़ुल्म के खिलाफ ऐतिहासिक आवाज़ उठाई। उनका संघर्ष आज भी हिम्मत, आत्म-सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड के वीर सपूतों ने अलग-अलग समय पर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए राज्य और समाज के लिए पूरी लगन दिखाई। सिदो और कान्हू की जयंती भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज है और हमें उनके आदर्शों को याद करने का मौका देती है।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज पूरे राज्य और देश में लोग इन महान हस्तियों को श्रद्धा के साथ याद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग उनकी मूर्तियों, जन्मस्थलों और शहीदी स्थलों पर जाकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज न केवल आदिवासी समुदाय, बल्कि पूरे देश को इन वीर सपूतों पर गर्व है जिन्होंने समाज और देश को बनाया।
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