Maithili Language News: मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा मैथिली को मात्र वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण ने कहा कि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इससे मातृभाषा शिक्षा का मूल उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मैथिली को केवल “वैकल्पिक विषय” के रूप में शामिल करना पर्याप्त नहीं है।
Maithili Language News: सरकार पर उपेक्षा का आरोप
विद्या भूषण ने कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा को अनिवार्य किए बिना भारतीय भाषाओं का सच्चा संरक्षण असंभव है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार केवल प्रतीकात्मक निर्णय लेकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि भारतीय भाषाओं को सही मायने में संरक्षित करना है, तो प्राथमिक स्तर से ही मातृभाषा में शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मिथिला क्षेत्र में लाखों बच्चे धीरे-धीरे अपनी मातृभाषा मैथिली से दूर होते जा रहे हैं। विद्यालयों में मैथिली पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, पाठ्यपुस्तकों की कमी है, और अधिकांश विद्यालयों में भाषा शिक्षा के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में, केवल मैथिली को विषय सूची में शामिल करने से जमीनी स्तर पर कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आएगा।
MSU अध्यक्ष ने कहा कि मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है, फिर भी शिक्षा व्यवस्था में इसे वह सम्मान और स्थान नहीं मिला है जिसका यह हकदार है। उन्होंने इसे मिथिला और मैथिली भाषी समुदाय की निरंतर उपेक्षा का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सरकारें वर्षों से मैथिली भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाने में विफल रही हैं।
उचित स्थान देने की मांग तेज
विद्या भूषण ने कहा कि “मातृभाषा का शिक्षण अनिवार्य है” जैसी सशक्त नीति के बिना देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना मुश्किल होगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सीबीएसई सहित सभी शिक्षा बोर्डों में मैथिली की नियमित शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने स्कूलों में मैथिली शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और भाषा शिक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था की भी मांग की।
मैथिली भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, मैथिली जैसी समृद्ध भाषा को शिक्षा प्रणाली में सशक्त स्थान देना आवश्यक है।
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