Darbhanga Flood News: कमला बलान नदी में आई बाढ़ ने बिहार के दरभंगा ज़िले के कुशेश्वर स्थान पूर्वी प्रखंड में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण इताहर, चौकिया, लक्ष्मिनिया और बल्थरबा गाँव लगभग टापू में बदल गए हैं। इन गाँवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे निवासियों को रोज़मर्रा के ज़रूरी काम करने में भी भारी कठिनाई हो रही है।
Darbhanga Flood News: अस्पताल, बाजार और स्कूल जाने के लिए नाव का सहारा
बाढ़ की वजह से सड़कें या तो पानी में डूब गई हैं या बह गई हैं। नतीजतन, ग्रामीणों को हर ज़रूरत के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, चाहे अस्पताल जाना हो, बाज़ार पहुँचना हो या बच्चों को स्कूल भेजना हो। बुज़ुर्गों, बीमारों और स्कूली बच्चों को सबसे ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें नदी पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
बच्चों की पढ़ाई और खेती पर पड़ा असर
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ़ दिख रहा है। कई छात्र स्कूल नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई में रुकावट आ रही है। वहीं, खेतों में खड़ी फ़सलें डूबने लगी हैं और पशुओं के लिए चारे की कमी भी तेज़ी से गंभीर होती जा रही है। इससे किसानों की चिंताएँ बढ़ गई हैं।
जलस्तर घटा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दो दिनों में कमला बलान नदी का जलस्तर कुछ कम तो हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। उनका कहना है कि अगर फिर से भारी बारिश होती है या नदी में ऊपर की ओर से और पानी छोड़ा जाता है, तो स्थिति एक बार फिर गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में, ब्लॉक की नौ पंचायतों में से कम से कम चार पंचायतों के हज़ारों लोग बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।
राहत कार्यों की मांग तेज
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रभावित गांवों में अभी तक पर्याप्त राहत सामग्री, सरकारी नावें या अन्य ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। बाढ़ की इस मुश्किल स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए, कुछ निजी नाव संचालक प्रति व्यक्ति ₹10 से ₹20 तक किराया वसूल रहे हैं, जिससे रोज़ाना आने-जाने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ज़िला प्रशासन और सर्कल ऑफ़िसर प्रभावित इलाकों में सरकारी नावों की संख्या बढ़ाएं, राहत का सामान उपलब्ध कराएं, तटबंधों की निगरानी और मज़बूती सुनिश्चित करें, और सुरक्षित जगहों पर अस्थायी राहत कैंप और मेडिकल सुविधाएं स्थापित करें। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते राहत और बचाव कार्य तेज़ नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने के लिए जल्द ही कारगर कदम उठाएगा।
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