BSL Displacement News: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में विस्थापित लोगों के रोजगार का मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थायी नौकरियों की मांग और प्रबंधन के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर रोजगार देने के प्रस्ताव के बीच विवाद कायम है। वहीं, प्रबंधन अपने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताता है कि 950 प्रशिक्षित अप्रेंटिस हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह संख्या लगभग 1,500 है।
प्रबंधन के अनुसार, अब तक 204 विस्थापित युवाओं को अनुबंध के आधार पर कुशल श्रमिकों के रूप में काम पर रखा गया है। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए प्रशिक्षण देने के बाद 50 से अधिक और युवाओं को कार्यबल में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
BSL Displacement News: ठेका नियोजन के जरिए रोजगार देने का प्रस्ताव
BSL प्रबंधन का कहना है कि नियुक्तियां केंद्र सरकार के नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार की जाती हैं। प्रबंधन के अनुसार, कुछ कानूनी अड़चनें हैं जिनकी वजह से स्थानीय स्तर पर विस्थापित लोगों को सीधे स्थायी नौकरी नहीं दी जा सकती।
इसके विकल्प के तौर पर, एक प्रस्ताव रखा गया है कि विस्थापित युवाओं को ठेकेदारों के माध्यम से कुशल कामगारों के रूप में काम पर रखा जाए, और आउटसोर्सिंग में उनके लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था हो। हालाँकि, प्रदर्शनकारी इस व्यवस्था को स्थायी रोजगार की अपनी मांग का उचित समाधान नहीं मानते हैं।
950 प्रशिक्षित अप्रेंटिस को प्राथमिकता देने की बात
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार कुल 950 प्रशिक्षित प्रशिक्षु (अप्रेंटिस) हैं। यह आंकड़ा प्रदर्शनकारियों द्वारा बताए गए 1,500 के आंकड़े से अलग है। प्रबंधन के अनुसार, विस्थापित युवाओं में से 204 को पहले ही अनुबंध के आधार पर कुशल श्रमिकों के रूप में काम पर रखा जा चुका है।
इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 50 से अधिक अन्य युवाओं को भी रोजगार प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। प्रबंधन ने ठेकेदारों के माध्यम से बचे हुए प्रशिक्षुओं (अप्रेंटिस) को प्राथमिकता के आधार पर काम उपलब्ध कराने का वादा किया है। हालाँकि, रोजगार की शर्तों, उपलब्ध पदों की संख्या और नियुक्तियों की समय-सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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स्थायी नौकरी की मांग पर कायम आंदोलनकारी
विस्थापित व्यक्तियों के संगठन से जुड़े प्रदर्शनकारी सीधे और स्थायी रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अनुबंध-आधारित रोजगार उनकी मांगों का कोई स्थायी समाधान नहीं है। दूसरी ओर, प्रबंधन नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए, रोजगार के किसी वैकल्पिक इंतजाम की वकालत कर रहा है। इस असहमति के कारण, दोनों पक्षों के बीच किसी समाधान तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
अब त्रिपक्षीय वार्ता से समाधान की उम्मीद
जिला प्रशासन की मध्यस्थता में होने वाली त्रिपक्षीय बातचीत इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। प्रशासन, BSL प्रबंधन और विस्थापितों के संगठन के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा के जरिए आगे का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा सकता है।
यदि इन वार्ताओं के दौरान विस्थापितों के लिए एक लिखित नीति जिसमें रोजगार में प्राथमिकता या पुनर्वास का कोई ठोस पैकेज जैसे पहलू शामिल हों और सहमति बन जाती है, तो इसे इस आंदोलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।
फिलहाल, स्थायी रोजगार की मांग और प्रबंधन द्वारा बताए गए कानूनी प्रावधानों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब सबकी नजरें बातचीत के अगले दौर पर टिकी हैं, और इस बात पर भी कि विस्थापित लोगों के रोजगार को लेकर कोई संभावित समाधान निकल सकता है या नहीं।
ओझा राजेश पुरोहित की रिपोर्ट
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