JSSC CGL Scam: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और कदाचार को लेकर विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है। इस सिलसिले में कार्मिक विभाग ने सुषमा कुमारी को निलंबित कर दिया है। सुषमा कुमारी का चयन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित ‘कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल’ (CGL) परीक्षा के माध्यम से हुआ था और वह ‘असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर’ (ASO) के पद पर नियुक्त थीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका निलंबन 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी माना जाएगा, यह वही दिन है जब उन्हें CID द्वारा दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है।
JSSC CGL Scam: JPSC परीक्षा मामले में भी जांच जारी
सीआईडी, जेपीएससी (JPSC) परीक्षा में अनियमितताओं और मेरिट लिस्ट में हेरफेर के आरोपों की जांच कर रही है। इस जांच के दायरे में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों, बिचौलियों, उम्मीदवारों और आयोग से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करना शामिल है।
OMR शीट के साथ छेड़छाड़ करने और कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के आरोप भी सामने आए हैं। अगस्त 2026 तक इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 20 बताई गई थी। हालाँकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों और जाँच के नतीजों के बीच अंतर समझना ज़रूरी है।
पेपर लीक मामले में भी कार्रवाई
इस बीच JSSC CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की जांच भी चल रही है। CID की जांच में इन आरोपों को देखा जा रहा है कि परीक्षा से पहले ही उम्मीदवारों को प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे या उन्हें ये याद करने में मदद की गई थी और एक नेटवर्क के जरिए उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया था।
10 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या 39 तक पहुँच गई थी। जांच एजेंसी अन्य सुरागों और इसमें शामिल हो सकने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
आपराधिक जांच के साथ विभागीय कार्रवाई
परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामलों में संबंधित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक जांच और विभागीय कार्यवाही दोनों शुरू की जा रही हैं। सुषमा कुमारी का निलंबन इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित विभागों द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगी। इन मामलों में दोषी कौन है, इसका अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।
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